Himachal News: हिमाचल प्रदेश के जनजातीय क्षेत्र काज़ा में सियासी पारा चढ़ गया है। यहाँ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ‘मनरेगा बचाओ’ अभियान के तहत केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। प्रदर्शनकारियों ने मोदी सरकार पर मनरेगा को कमजोर करने का गंभीर आरोप लगाया। उनका कहना है कि यह योजना ग्रामीणों की जीवनरेखा है और इसे बचाने के लिए वे सड़क पर उतर आए हैं।
गरीब विरोधी नीतियों पर मोदी सरकार को घेरा
काज़ा मुख्यालय में आयोजित इस बैठक में कांग्रेस ने जोरदार विरोध दर्ज करवाया। कार्यकर्ताओं ने शांतिपूर्ण अनशन रखकर अपना गुस्सा जाहिर किया। उनका सीधा आरोप है कि केंद्र की मोदी सरकार मनरेगा को खत्म करने की साजिश कर रही है। वक्ताओं ने इसे सरकार की गरीब विरोधी नीति करार दिया। उनका मानना है कि सरकार जानबूझकर इस योजना का बजट और महत्व कम कर रही है।
मनरेगा: गांवों की रीढ़ पर प्रहार?
अभियान समन्वयक आरती निर्मोही ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि मनरेगा कोई साधारण योजना नहीं है। यह गांवों को मजबूत करती है और लोगों को रोजगार देकर पलायन से रोकती है। निर्मोही ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार इस ऐतिहासिक योजना को लगातार कमजोर कर रही है। उन्होंने दावा किया कि योजना से महात्मा गांधी जी का नाम तक हटाया जा रहा है। इसे उन्होंने बेहद दुर्भाग्यपूर्ण कदम बताया।
इन दिग्गजों ने संभाला मोर्चा
इस अनशन में घाटी के कई बड़े चेहरे शामिल हुए। इनमें छटुप दौरजे, काज़ा की प्रधान सोनम डोलमा और पूर्व महासचिव लौबजंग मुख्य थे। इसके अलावा टीएससी सदस्य सन्नी और बीर भगत भी मौजूद रहे। पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष छेरिग टशी, गुलाब सिंह और मीडिया प्रभारी कुजग गटुक ने भी अपनी आवाज उठाई। कार्यकर्ताओं ने बैनर और नारों के साथ सरकार की मनमानी नीतियों का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध किया।
पहाड़ों पर विकास कार्यों की चिंता
लाहौल-स्पीति जैसे दुर्गम इलाकों में मनरेगा ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है। यहाँ सड़क निर्माण, जल संरक्षण और वनरोपण जैसे महत्वपूर्ण कार्य इसी योजना पर निर्भर हैं। कांग्रेस नेताओं ने साफ कर दिया है कि जब तक मजदूरों और किसानों के हक सुरक्षित नहीं होते, यह संघर्ष जारी रहेगा। फिलहाल जिला प्रशासन की ओर से इस प्रदर्शन पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
Reported By: Vijay Thakur

