New Delhi: भारत ने अमेरिकी दालों पर आयात शुल्क (टैरिफ) बढ़ा दिया है। भारत के इस सख्त कदम से अमेरिका के किसानों को बड़ा झटका लगा है। इस मुद्दे को सुलझाने के लिए अमेरिकी सीनेटर स्टीव डेन्स ने रविवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात की। इससे पहले अमेरिकी सीनेटरों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी चिट्ठी लिखी थी। वे चाहते हैं कि भारत के साथ बातचीत कर इस टैक्स को कम कराया जाए।
भारत के जवाबी हमले से अमेरिका परेशान
भारत दुनिया में दालों का सबसे बड़ा उपभोक्ता देश है। पूरी दुनिया में जितनी दाल खाई जाती है, उसका 27 फीसदी हिस्सा अकेले भारत में खपत होता है। अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत अमेरिका, रूस, ऑस्ट्रेलिया और म्यांमार जैसे देशों से आयात करता है। हाल ही में अमेरिका ने कुछ भारतीय उत्पादों पर टैरिफ बढ़ाया था। इसके जवाब में भारत ने भी अमेरिकी दालों पर 30 फीसदी टैरिफ लगा दिया। चूंकि भारत कृषि उत्पादों का एक विशाल बाजार है, इसलिए अमेरिका को यह फैसला बिल्कुल रास नहीं आया है।
राष्ट्रपति ट्रंप से हस्तक्षेप की मांग
अमेरिका के मोंटाना से रिपब्लिकन सीनेटर स्टीव डेन्स और नॉर्थ डकोटा के केविन क्रेमर ने इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया है। उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप को एक पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने राष्ट्रपति से अनुरोध किया कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात करें। उनका कहना है कि दलहन फसलों पर लगे टैरिफ को कम करना बहुत जरूरी है। इसी सिलसिले में स्टीव डेन्स ने नई दिल्ली में विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों और रणनीतिक महत्व पर भी चर्चा की।
किसानों को हो रहा भारी नुकसान
दोनों रिपब्लिकन सीनेटरों ने 16 जनवरी को लिखे अपने पत्र में किसानों की पीड़ा बताई थी। मोंटाना और नॉर्थ डकोटा अमेरिका में दलहन फसलों के सबसे बड़े उत्पादक राज्य हैं। भारत ने 1 नवंबर से अमेरिका की पीली मटर पर 30 फीसदी टैरिफ लगा दिया है। इस कारण अमेरिकी किसानों को भारत में अपना माल बेचने में मुश्किल हो रही है। उन्हें अपने उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों पर बड़ा आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। सीनेटरों ने ट्रंप प्रशासन से आग्रह किया है कि भारत के साथ ट्रेड डील में इस मुद्दे को प्राथमिकता से उठाया जाए।

