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अंतरिक्ष में मंडराया महासंकट! SpaceX की एक गलती से ठप हो जाएगा इंटरनेट? जानिए क्या है ‘केसलर सिंड्रोम’

International News: अंतरिक्ष में एक बड़ा खतरा मंडरा रहा है। एलन मस्क की कंपनी SpaceX का एक सैटेलाइट बेकाबू हो गया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इससे ‘केसलर सिंड्रोम’ का खतरा पैदा हो सकता है। अगर ऐसा हुआ तो पूरी दुनिया में इंटरनेट और जीपीएस सेवाएं बंद हो सकती हैं। यह सैटेलाइट अब तेजी से पृथ्वी की ओर गिर रहा है।

SpaceX का सैटेलाइट हुआ बेकाबू

रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्टारलिंक का सैटेलाइट नंबर 35956 अपने रास्ते से भटक गया है। इसने 17 दिसंबर को काम करना बंद कर दिया था। उस समय यह सैटेलाइट 418 किलोमीटर की ऊंचाई पर था। अचानक इसका प्रोपल्शन टैंक फट गया। इससे गैस लीक होने लगी और सैटेलाइट की ऊंचाई चार किलोमीटर कम हो गई। SpaceX ने बताया है कि यह सैटेलाइट अब पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करेगा। वहां यह घर्षण के कारण जलकर नष्ट हो जाएगा। हालांकि, इसके मलबे से अंतरिक्ष में बड़ा खतरा पैदा हो गया है।

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क्या है केसलर सिंड्रोम का खतरा?

शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि इस घटना से केसलर सिंड्रोम शुरू हो सकता है। यह अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़ा एक गंभीर खतरा है। नासा के वैज्ञानिक डोनाल्ड जे. केसलर ने 1978 में यह सिद्धांत दिया था। इसके अनुसार, जब दो सैटेलाइट या अंतरिक्ष का कचरा आपस में टकराता है, तो हजारों छोटे टुकड़े बनते हैं। ये टुकड़े फिर दूसरे सैटेलाइट्स से टकराते हैं। इससे टकराने का एक चेन रिएक्शन (डोमिनो इफेक्ट) शुरू हो जाता है। इससे अंतरिक्ष का इस्तेमाल करना असंभव हो जाता है।

दुनिया भर में इंटरनेट हो जाएगा ठप

अगर SpaceX के सैटेलाइट के मलबे से यह स्थिति बनी, तो पृथ्वी पर भारी नुकसान होगा। स्टारलिंक जैसे सैटेलाइट ही हमें इंटरनेट कनेक्शन देते हैं। केसलर सिंड्रोम से इंटरनेट सेवा पूरी तरह बाधित हो जाएगी। इसका सीधा असर जीपीएस और नेविगेशन सिस्टम पर पड़ेगा। नेविगेशन फेल होने से दुर्घटनाएं बढ़ सकती हैं। इसके अलावा शेयर बाजार पर भी बुरा असर दिखेगा। मौसम वाले सैटेलाइट खराब होने से मौसम की सही जानकारी नहीं मिल पाएगी।

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भविष्य के मिशन पर लगेगा ब्रेक

अंतरिक्ष में कचरा बढ़ने से नए मिशन लॉन्च करना मुश्किल हो जाएगा। वैज्ञानिक दशकों तक अंतरिक्ष में नहीं जा पाएंगे। युद्ध या सुरक्षा से जुड़ी गतिविधियों में भी बाधा आएगी। यह मलबा इतनी तेजी से बढ़ता है कि इसे रोकना नामुमकिन हो जाता है। फिलहाल वैज्ञानिक इस स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

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