New Delhi News: केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) अब उद्योगों और हवाई अड्डों के साथ-साथ समुद्र तटों की भी रक्षा में अहम भूमिका निभाएगा। इसके लिए 28 जनवरी से एक विशाल ‘तटीय साइक्लोथॉन’ की शुरुआत हो रही है। इस बीच सीआईएसएफ के डीजी प्रवीर रंजन ने अग्निवीरों की भर्ती को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने संकेत दिए हैं कि नौसेना के अग्निवीरों को सीआईएसएफ में खास जिम्मेदारी मिल सकती है।
अग्निवीरों के लिए तैयार हो रहा ‘ब्लूप्रिंट’
डीजी प्रवीर रंजन ने अग्निवीरों के भविष्य को लेकर एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि नौसेना से अपना कार्यकाल पूरा करने वाले अग्निवीरों को सीआईएसएफ में शामिल किया जा सकता है। इन अनुभवी जवानों को भविष्य में बंदरगाह और समुद्री सुरक्षा में तैनात करने पर विचार किया जा रहा है। विभाग फिलहाल इस दिशा में काम कर रहा है और एक विस्तृत ‘ब्लूप्रिंट’ तैयार किया जा रहा है। यह कदम अग्निवीरों के लिए रोजगार के नए रास्ते खोल सकता है।
28 जनवरी से शुरू होगा 6,500 किमी का सफर
सीआईएसएफ 28 जनवरी 2026 से ‘तटीय साइक्लोथॉन’ का दूसरा संस्करण शुरू करने जा रहा है। यह अभियान 25 दिनों तक चलेगा और 22 फरवरी को समाप्त होगा। इसमें जवान साइकिल से पूर्वी और पश्चिमी तटों के करीब 6,500 किलोमीटर इलाके को कवर करेंगे। यह यात्रा देश के 11 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से होकर गुजरेगी। इस आयोजन का मकसद तटीय सुरक्षा को लेकर एक बड़ा संदेश देना है।
सुरक्षित तट और समृद्ध भारत का सपना
इस अभियान का थीम ‘सुरक्षित तट, समृद्ध भारत’ रखा गया है। इसका मुख्य उद्देश्य तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को जागरूक करना है। जवान आम लोगों को तस्करी, हथियार और नशीले पदार्थों की घुसपैठ रोकने के प्रति सचेत करेंगे। साथ ही तटीय समुदायों को राष्ट्रीय सुरक्षा और विकास से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। यह आयोजन ‘वंदे मातरम’ के 150 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में किया जा रहा है।
एनसीसी कैडेट भी बनेंगे हिस्सा
देश की करीब 18 प्रतिशत आबादी तटीय जिलों में रहती है। इन लोगों को पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ जीवनशैली का संदेश देना जरूरी है। इस बार एनसीसी के महानिदेशक ने भी सीआईएसएफ से संपर्क किया है। उन्होंने एनसीसी कैडेट्स को भी इस ऐतिहासिक साइक्लोथॉन में शामिल करने का अनुरोध किया है। बता दें कि इसका पहला संस्करण मार्च 2025 में आयोजित किया गया था।
