हिमाचल की प्यास बुझाने के लिए केंद्र के साथ बड़ा समझौता: सुक्खू ने केंद्र से मांगे 1227 करोड़, पहाड़ों के लिए बदले जाएंगे नियम!

Himachal News: हिमाचल प्रदेश के हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुँचाने की दिशा में शुक्रवार को एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया। नई दिल्ली में भारत सरकार और हिमाचल सरकार के बीच जल जीवन मिशन (JJM) 2.0 के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर हुए। इस अहम कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री शिमला से वर्चुअल माध्यम से जुड़े। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की उपस्थिति में हुए इस समझौते का मुख्य लक्ष्य ग्रामीण इलाकों की जलापूर्ति व्यवस्था में ढांचागत सुधार करना और पुरानी पाइपलाइनों का पुनर्निर्माण करना है।

पहाड़ों की कठिन चुनौती और बजट की मांग

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने केंद्र सरकार के सामने हिमाचल की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों का पक्ष मजबूती से रखा। उन्होंने कहा कि मैदानी राज्यों के मापदंडों को हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों पर थोपना गलत है। पहाड़ों में निर्माण कार्य काफी महंगा और चुनौतीपूर्ण होता है। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री से हिमाचल के लंबित 1227 करोड़ रुपये तत्काल जारी करने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि कई प्रोजेक्ट्स का काम पूरा हो चुका है, लेकिन फंड की कमी से भुगतान में दिक्कतें आ रही हैं। सुक्खू ने जोर दिया कि सरकार अब पंचायतों के जरिए जल प्रबंधन को और अधिक पारदर्शी बनाएगी।

ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की समस्या का होगा अंत

उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने इस अवसर पर जल शक्ति विभाग के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि जेजेएम 2.0 से प्रदेश के दूरदराज और दुर्गम क्षेत्रों में पानी की किल्लत पूरी तरह खत्म हो जाएगी। इस नए समझौते के तहत उन योजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी, जिन पर राज्य सरकार पहले ही काफी पैसा खर्च कर चुकी है। हिमाचल सरकार का उद्देश्य केवल पानी की पाइप लाइन बिछाना नहीं है, बल्कि आधुनिक तकनीक के जरिए हर नागरिक को स्वच्छ और सुरक्षित पानी उपलब्ध कराना है।

समझौते की मुख्य बातें और भविष्य की राह

इस एमओयू पर हिमाचल की ओर से जल शक्ति सचिव डॉ. अभिषेक जैन और केंद्र की ओर से संयुक्त सचिव स्वाति नायक ने हस्ताक्षर किए। समझौते के तहत अब एकल ग्राम योजनाओं (SVS) पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में पानी के वितरण को लेकर नई संरचनात्मक नीतियां बनाई जाएंगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि आधुनिक तकनीक के समावेश से ही हिमाचल जैसे राज्य में जलापूर्ति को स्थायी बनाया जा सकता है। सरकार हर नागरिक तक पानी पहुँचाने के अपने संकल्प पर पूरी तरह अडिग है।

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