Delhi News: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने एक बड़े ऑपरेशन में अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक को छह यूक्रेनी नागरिकों के साथ गिरफ्तार किया है। यह मामला ड्रोन वॉरफेयर ट्रेनिंग, अवैध रूप से सीमा पार करने और पूर्वोत्तर के पास सक्रिय सशस्त्र समूहों से संबंधों से जुड़ा है। सभी आरोपियों को दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 11 दिन की एनआईए कस्टडी में भेज दिया गया।
कौन है मैथ्यू वैनडाइक?
मैथ्यूवैनडाइक खुद को सुरक्षा विश्लेषक, युद्ध संवाददाता और डॉक्यूमेंट्री फिल्मकार बताता है। उसे अंतरराष्ट्रीय पहचान 2011 के लीबियाई गृहयुद्ध के दौरान मिली, जब वह वहां विद्रोही लड़ाकों के साथ शामिल हुआ और कैद भी रहा। इसके बाद उसने सन्स ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल (एसओएलआई) नाम की संस्था बनाई, जो दुनिया के अलग-अलग संघर्ष क्षेत्रों में स्थानीय सशस्त्र समूहों को ट्रेनिंग और रणनीतिक सलाह देती है।
भारत में कैसे पहुंचा मामला?
मैथ्यूवैनडाइक को कोलकाता से गिरफ्तार किया गया, जबकि तीन यूक्रेनी नागरिक लखनऊ से और तीन यूक्रेनी नागरिक दिल्ली से पकड़े गए। एनआईए सूत्रों के मुताबिक, 14 यूक्रेनी नागरिक अलग-अलग तारीखों में टूरिस्ट वीजा पर भारत आए, गुवाहाटी पहुंचे और वहां से बिना जरूरी परमिट के मिजोरम चले गए। इसके बाद वे अवैध रूप से म्यांमार में घुस गए। इनका मकसद म्यांमार में एथनिक आर्म्ड ग्रुप्स (ईएजी) को ड्रोन वॉरफेयर की ट्रेनिंग देना था।
ड्रोन और हथियारों की साजिश
जांच मेंसामने आया है कि यूरोप से बड़ी संख्या में ड्रोन मंगाए गए थे। इन ड्रोन को भारत के रास्ते म्यांमार भेजा गया और इनका इस्तेमाल ट्रेनिंग कैंप में किया जाना था। एनआईए के अनुसार, म्यांमार के कुछ सशस्त्र समूहों के संबंध भारत में प्रतिबंधित संगठनों से भी हैं, जो भारत की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा पैदा कर सकते हैं।
जांच में क्या हो रहा है?
फिलहाल आरोपियोंके मोबाइल फोन की जांच की जा रही है। उनके नेटवर्क और भारत में संभावित कनेक्शन तलाशे जा रहे हैं। साथ ही यह भी जांच हो रही है कि ड्रोन भारत के जरिए कैसे भेजे गए। गौरतलब है कि मार्च 2025 में लालदुहोमा ने चेतावनी दी थी कि अमेरिका और ब्रिटेन के भाड़े के सैनिक और पूर्व सैनिक मिजोरम के रास्ते म्यांमार जा रहे हैं, जहां वे स्थानीय समूहों को ट्रेनिंग दे रहे हैं।
क्यों अहम है यह मामला?
यह मामलाभारत की राष्ट्रीय सुरक्षा से सीधे जुड़ा है। ड्रोन वॉरफेयर और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की आशंका ने सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया है। इस पूरे नेटवर्क से पूर्वोत्तर में उग्रवादी गतिविधियों को बढ़ावा मिलने का भी खतरा पैदा हो गया है।


