हिमाचल में अफसरों की शामत! विधानसभा में बड़े अधिकारियों की पेशी, डीसी मंडी ने मांगी माफी

Himachal News: हिमाचल प्रदेश विधानसभा में मंगलवार को विशेषाधिकार हनन कमेटी की बैठक में अफरातफरी का माहौल रहा। विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया की अध्यक्षता में आठ से अधिक महत्वपूर्ण मामलों पर सुनवाई हुई। इस दौरान राज्य के मुख्य सचिव संजय गुप्ता, गृह सचिव केके पंत और कार्मिक सचिव एम सुधा देवी को मौखिक पेशी के लिए बुलाया गया। सरकार और नौकरशाही के बीच बढ़ते तनाव के बीच कई अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई के संकेत मिले हैं।

डीसी मंडी ने मांगी माफी, आईपीएस को आखिरी अल्टीमेटम

मंडी के डीसी अपूर्व देवगन ने विशेषाधिकार कमेटी के सामने अपना लिखित जवाब दाखिल कर दिया है। उन्होंने आयुर्वेद मंत्री यादविंदर गोमा को रिसीव न कर पाने की चूक पर स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए माफी मांगी है। कमेटी अब इस पर मंत्री की राय लेगी। दूसरी ओर, आईपीएस अधिकारी इल्मा अफरोज की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। उन्हें जवाब देने के लिए 15 दिन का आखिरी नोटिस जारी किया गया है। विधायक रामकुमार ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल रखा है।

संजीव गांधी और कर्मचारी नेताओं पर लटकी तलवार

शिमला के पूर्व एसपी संजीव गांधी के खिलाफ भाजपा विधायक सुधीर शर्मा के नोटिस पर भी चर्चा हुई। कमेटी को बताया गया कि इस मामले में डीजीपी की रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय को भेज दी गई है। इसके अलावा, कर्मचारी महासंघ के पूर्व पदाधिकारियों के खिलाफ मामला भी अभी शांत नहीं हुआ है। तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी कर्मचारी नेताओं के जवाब से संतुष्ट नहीं हैं। इसके चलते यह केस अभी लंबित रखा गया है और आगे की कार्यवाही जारी रहेगी।

विधायकों की क्रॉस वोटिंग और अनुशासन का मामला

पिछले साल राज्यसभा चुनाव के दौरान हुई क्रॉस वोटिंग और सदन के भीतर दुर्व्यवहार का मामला भी कमेटी के सामने आया। कांग्रेस विधायक अजय सोलंकी ने भाजपा विधायकों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया था। कई विधायकों ने अभी तक अपना स्पष्टीकरण जमा नहीं किया है। वहीं, बंजार के तहसीलदार और फॉरेस्ट गार्ड को भी भाजपा विधायक सुरेंद्र शौरी की शिकायत पर तलब किया गया है। विधानसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया है कि सदन की गरिमा से समझौता नहीं होगा।

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