India News: पश्चिम एशिया में जारी भीषण युद्ध का असर अब भारत की रसोई और एनर्जी सेक्टर पर पड़ता दिख रहा है। सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रैट (Strait of Hormuz) के पास भारत आने वाले 22 जहाज फंस गए हैं। इन जहाजों में भारी मात्रा में कच्चा तेल (Crude Oil) और एलपीजी (LPG) लदी हुई है। भारत सरकार ने अपने इन जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए बड़े पैमाने पर कूटनीतिक मुहिम शुरू कर दी है। विदेश मंत्रालय लगातार ईरान, अमेरिका और इजरायल जैसे देशों के संपर्क में है ताकि देश की ऊर्जा सुरक्षा बनी रहे।
होर्मुज में फंसी ऊर्जा की खेप: 6 एलपीजी और 4 तेल टैंकर शामिल
शिपिंग मिनिस्ट्री के अनुसार, फंसे हुए 22 जहाजों में 4 कच्चे तेल के टैंकर, 6 एलपीजी और एक एलएनजी जहाज शामिल हैं। इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू करने के बाद समुद्री यातायात ठप हो गया है। ईरान ने इस रास्ते से गुजरने वाले अधिकांश जहाजों की आवाजाही पर रोक लगा दी है। यह रास्ता दुनिया की 20 प्रतिशत तेल और गैस सप्लाई के लिए एकमात्र जरिया है। अगर ये जहाज लंबे समय तक फंसे रहे, तो भारत में ईंधन की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
भारत की कूटनीतिक जीत, दो बड़े जहाजों को मिला रास्ता
तनाव के बीच भारत के लिए एक राहत भरी खबर भी आई है। ईरान ने भारत के साथ कूटनीतिक रिश्तों का सम्मान करते हुए दो जहाजों को निकलने की अनुमति दी है। शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के गैस कैरियर ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ होर्मुज पार कर ओमान की खाड़ी में पहुंच गए हैं। इन जहाजों में 92 हजार टन से अधिक एलपीजी लदी है। ये जहाज 16 और 17 मार्च तक गुजरात के मुंद्रा और कांडला बंदरगाह पहुंचेंगे। ईरान के राजदूत मोहम्मद फताली ने भी इसकी पुष्टि की है।
ब्रिक्स और खाड़ी देशों के जरिए समाधान की कोशिश
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत की प्राथमिकता सुरक्षित समुद्री आवाजाही सुनिश्चित करना है। इसके लिए भारत खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) और ब्रिक्स (BRICS) देशों के साथ मिलकर काम कर रहा है। भारत वर्तमान में ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है, जिसमें अब ईरान भी शामिल है। भारत इस मंच का उपयोग समुद्री संकट को हल करने और वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता लाने के लिए कर रहा है।
क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज स्ट्रैट?
होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान के तट के पास स्थित एक संकरा समुद्री रास्ता है। यह खाड़ी देशों से तेल निर्यात करने का सबसे प्रमुख मार्ग है। युद्ध के कारण इस रास्ते के बंद होने से न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया में तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल इसी रास्ते से मंगाता है, इसलिए केंद्र सरकार इस मामले को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।

