मिडिल ईस्ट में जंग से रसोई गैस पर गहराया संकट! क्या पीएनजी (PNG) पाइपलाइन भी हो जाएगी बंद?

New Delhi News: मध्य पूर्व में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच छिड़े भीषण युद्ध को दो हफ्ते बीत चुके हैं। हजारों किलोमीटर दूर हो रही इस जंग की तपिश अब भारतीय रसोई तक पहुंच गई है। देश के कई हिस्सों में एलपीजी (LPG) सिलेंडर की किल्लत शुरू हो गई है। बुकिंग के बाद भी समय पर सिलेंडर नहीं मिलने से लोग परेशान हैं। इस संकट ने उन 1.36 करोड़ परिवारों की धड़कनें भी बढ़ा दी हैं, जिनके घरों में पाइपलाइन यानी पीएनजी (PNG) गैस आती है। हालांकि, सरकार ने इस संकट से निपटने के लिए एक बड़ा मास्टर प्लान तैयार किया है।

PNG ग्राहकों को डरने की जरूरत नहीं

देश में फिलहाल करीब 33.2 करोड़ एलपीजी कनेक्शन हैं, जो इस समय सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। सिलेंडर की कमी के कारण कालाबाजारी की खबरें भी सामने आ रही हैं। ऐसे में पीएनजी इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों को डर है कि कहीं उनके घरों की सप्लाई भी न कट जाए। गैस डिस्ट्रीब्यूटर्स ने साफ किया है कि घरेलू पाइपलाइन की सप्लाई में कोई रुकावट नहीं आएगी। पीएनजी सप्लाई को सुरक्षित रखने के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। राहत की बात यह है कि अब तक कहीं से भी लो-प्रेशर या सप्लाई बंद होने की शिकायत नहीं मिली है।

सरकार ने लागू किया आवश्यक वस्तु अधिनियम

ईंधन की निर्बाध सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955’ लागू कर दिया है। सरकार की नई नीति के अनुसार, नेशनल ग्रिड से मिलने वाली गैस में सबसे पहली प्राथमिकता आम घरों को दी जाएगी। सरकार ने पीएनजी और परिवहन के लिए सीएनजी (CNG) को ‘टॉप प्रायोरिटी’ लिस्ट में रखा है। इसका मतलब है कि पिछले छह महीनों की औसत खपत का 100 प्रतिशत हिस्सा घरों को बिना किसी रुकावट के मिलेगा। उद्योगों और पावर प्लांट्स को गैस की सप्लाई घरेलू जरूरतों को पूरा करने के बाद ही की जाएगी।

इंडस्ट्रियल गैस महंगी, घरेलू सप्लाई सुरक्षित

अवंतिका गैस लिमिटेड के अधिकारियों के मुताबिक, युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर गैस की लागत जरूर बढ़ी है। इस बढ़ी हुई कीमतों का असर मुख्य रूप से औद्योगिक क्षेत्र पर पड़ा है। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह है कि उनकी सप्लाई को सरकार ने सुरक्षा कवच दिया है। वर्तमान में पाइपलाइन गैस का इस्तेमाल करने वाले परिवारों को घबराने या चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। सरकार और वितरण कंपनियां स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं ताकि रसोई का चूल्हा जलता रहे।

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