Ayodhya News: अयोध्या में आयोजित दो दिवसीय आरएसएसडीआई यूपीकॉन-2026 डायबिटीज कॉन्फ्रेंस में मेरठ के प्रसिद्ध छाती एवं श्वास रोग विशेषज्ञ डॉ. वीरोत्तम तोमर को फैकल्टी के रूप में आमंत्रित किया गया। इस राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन में उन्होंने फेफड़ों की फाइब्रोसिस से पीड़ित मरीजों में शुगर नियंत्रण के महत्व पर विस्तृत व्याख्यान दिया। कॉन्फ्रेंस में देशभर से 1000 से अधिक डायबिटीज विशेषज्ञ और चिकित्सक शामिल हुए।
फेफड़ों के मरीजों के लिए जरूरी है शुगर कंट्रोल
डॉ.वीरोत्तम तोमर ने अपने संबोधन में बताया कि फेफड़ों की फाइब्रोसिस (सिकुड़न) से पीड़ित मरीजों में ब्लड शुगर का स्तर 140 से 180 के बीच बनाए रखना बेहद जरूरी है। साथ ही तीन महीने का औसत शुगर लेवल (एचबीए1सी) 7 से कम होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि शुगर नियंत्रित नहीं रहेगी तो ऐसे मरीजों में फेफड़ों का संक्रमण, निमोनिया और टीबी जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
खाली पेट शुगर नहीं, खाने के बाद की जांच है जरूरी
डॉ.तोमर ने एक अहम जानकारी साझा करते हुए बताया कि कई बार फेफड़ों की बीमारी वाले मरीजों में खाली पेट शुगर सामान्य दिखती है, लेकिन नाश्ते के दो घंटे बाद शुगर बढ़ी हुई मिलती है। इसलिए इन मरीजों में पोस्ट-प्रांडियल (नाश्ते के दो घंटे बाद) ब्लड शुगर जांच कराना बेहद आवश्यक है। उन्होंने मरीजों को सलाह दी कि जरूरत पड़ने पर इंसुलिन के इस्तेमाल से घबराना नहीं चाहिए, क्योंकि समय पर इलाज से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है। कॉन्फ्रेंस में मधुमेह और उससे जुड़ी बीमारियों के आधुनिक उपचार और प्रबंधन पर विस्तार से चर्चा की गई।

