Himachal News: हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां तीसा स्थित स्कूल में तैनात जीव विज्ञान की प्रवक्ता अर्चना शर्मा को सरकार ने नौकरी से निकाल दिया है। अर्चना शर्मा ने साल 2019 में ज्वाइनिंग के बाद स्कूल में केवल 3 दिन ही काम किया। इसके बाद वे बिना किसी अनुमति के लगातार 5 साल तक ड्यूटी से गायब रहीं। शिक्षा विभाग ने इस लंबी लापरवाही को बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ माना है। विभागीय जांच में दोषी पाए जाने के बाद आखिरकार उन्हें सेवा से बर्खास्त करने का आदेश जारी कर दिया गया है।
ड्यूटी से गायब रहने का बनाया अनोखा रिकॉर्ड
अर्चना शर्मा ने 6 सितंबर 2019 को राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय तीसा में अपना कार्यभार संभाला था। हैरानी की बात यह है कि वह केवल तीन दिन स्कूल आईं। इसके बाद उन्होंने अवकाश के बहाने बनाए और 8 नवंबर 2019 से लापता हो गईं। विभाग ने इस मामले को अनुशासनहीनता की पराकाष्ठा माना है। बिना अनुमति इतने वर्षों तक पद पर बने रहना नियमों का सीधा उल्लंघन है। इससे स्कूल में जीव विज्ञान विषय पढ़ने वाले छात्रों की पढ़ाई का भारी नुकसान हुआ है।
जांच से भी बनाई दूरी, विभाग ने लिया कड़ा एक्शन
शिक्षा विभाग ने 16 अक्टूबर 2024 को अर्चना शर्मा के खिलाफ आरोप पत्र जारी किया था। जांच के दौरान उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए कई बार नोटिस दिए गए। इसके बावजूद उन्होंने न तो जांच में हिस्सा लिया और न ही स्कूल वापस लौटीं। विभाग ने इसे सरकारी आदेशों की अवहेलना माना। इसके बाद जांच अधिकारी ने एकतरफा कार्रवाई करते हुए अपनी रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में उन पर लगे लापरवाही और ड्यूटी से गायब रहने के सभी आरोप पूरी तरह सच पाए गए।
VRS की मांग को विभाग ने किया खारिज
दिसंबर 2025 में विभाग ने उन्हें अंतिम कारण बताओ नोटिस जारी किया था। अर्चना शर्मा ने इस नोटिस का जवाब तो दिया, लेकिन उसमें कोई ठोस दलील पेश नहीं की। उन्होंने विभाग से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) देने की गुहार लगाई। शिक्षा विभाग ने नियमों का हवाला देते हुए इस मांग को तुरंत ठुकरा दिया। नियमानुसार, जब किसी कर्मचारी पर अनुशासनात्मक कार्रवाई चल रही हो, तो उसे सेवानिवृत्ति का लाभ नहीं मिल सकता।
विद्यार्थियों के भविष्य के साथ हुआ खिलवाड़
तीसा एक दुर्गम क्षेत्र है जहां शिक्षकों की कमी पहले से ही चुनौती बनी रहती है। अर्चना शर्मा के पांच साल तक स्कूल न आने से स्थानीय विद्यार्थियों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। विभाग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि एक जिम्मेदार अधिकारी का ऐसा व्यवहार कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। रिकॉर्ड के अनुसार, अर्चना शर्मा ने स्कूल ज्वाइन करने के बाद पांच साल तक कर्तव्य का पालन नहीं किया। इसी आधार पर उन्हें तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया है।

