Himachal News: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने एक बड़ी घोषणा की है। राज्य सरकार 21 मार्च को अपना आगामी बजट पेश करने जा रही है। यह बजट पूरी तरह से आत्मनिर्भरता पर केंद्रित होगा। इसका मुख्य उद्देश्य समाज के हर वर्ग का कल्याण सुनिश्चित करना है। राज्य को मिलने वाले राजस्व घाटा अनुदान (RDG) में बड़ी कमी आई है। इसके बावजूद सरकार ने स्पष्ट किया है कि सामाजिक योजनाओं, कर्मचारियों के वेतन या पेंशन में कोई कटौती नहीं की जाएगी। यह खबर प्रदेश के लाखों कर्मचारियों और आम लोगों के लिए एक बड़ी राहत है।
वेतन और पेंशन पर नहीं चलेगी कैंची
मुख्यमंत्री सुक्खू ने शिमला स्थित राज्य सचिवालय में मीडिया से खास बातचीत की। उन्होंने कहा कि आगामी बजट कटौती वाला बजट बिल्कुल नहीं होगा। सरकार समाज के हर तबके का पूरा ध्यान रखेगी। प्रदेश में कोई भी सामाजिक कल्याण योजना बंद नहीं की जाएगी। सरकारी कर्मचारियों के वेतन और पेंशन में भी कोई कटौती नहीं होगी। सरकार बजट तैयार करने के लिए लगातार बैठकें कर रही है। राज्य को धीरे-धीरे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश की जा रही है।
हर साल होगा 10 हजार करोड़ का नुकसान
राज्य सरकार इस समय भारी वित्तीय दबाव का सामना कर रही है। 16वें वित्त आयोग ने हिमाचल को मिलने वाले राजस्व घाटा अनुदान को बंद कर दिया है। यह अनुदान राज्य को पिछले सात दशकों से लगातार मिल रहा था। इस फैसले से राज्य को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। साल 2026 से 2031 के बीच हर साल 8,000 से 10,000 करोड़ रुपये का घाटा होगा। इसलिए सरकार के लिए अपने राजस्व संसाधनों को बढ़ाना और मजबूत करना बेहद जरूरी हो गया है।
पर्यावरण बचाने की भारी कीमत चुका रहा हिमाचल
मुख्यमंत्री सुक्खू ने एक बहुत महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश देश के पर्यावरण संतुलन में बड़ा योगदान देता है। राज्य हर साल 90,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की पर्यावरणीय सेवाएं देश को देता है। लेकिन इसके बदले में राज्य को बहुत कम मुआवजा मिलता है। सीएम ने बेबाकी से कहा कि अगर राज्य को व्यावसायिक काम के लिए पेड़ काटने की छूट मिल जाए, तो उसे किसी राजस्व घाटा अनुदान की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।
केंद्र की कंपनियों से 50 प्रतिशत रॉयल्टी की मांग
हिमाचल प्रदेश में कई बड़ी जलविद्युत परियोजनाएं चल रही हैं। एसजेवीएन, एनएचपीसी और एनटीपीसी जैसी केंद्रीय कंपनियां यहां बिजली बनाती हैं। राज्य को इन कंपनियों से केवल 12 प्रतिशत रॉयल्टी मिलती है। मुख्यमंत्री ने मांग की है कि अगर ये परियोजनाएं ऋण-मुक्त हो जाती हैं, तो राज्य को 50 प्रतिशत रॉयल्टी मिलनी चाहिए। अगर ऐसा होता है, तो हिमाचल को किसी आरडीजी सहायता की जरूरत नहीं होगी। संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत यह अनुदान उन राज्यों को मिलता है, जहां कमाई और खर्च में बड़ा अंतर होता है।


