45 की उम्र के बाद शरीर में होने वाले इन बदलावों को न करें नजरअंदाज, जानें मेनोपॉज में खुद को कैसे रखें फिट

India News: मेनोपॉज महिलाओं के जीवन का एक अनिवार्य और प्राकृतिक पड़ाव है। इस दौरान पीरियड्स स्थायी रूप से बंद हो जाते हैं। आमतौर पर यह बदलाव 45 से 55 साल की उम्र के बीच आता है। इस चरण में शरीर के भीतर एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरोन जैसे महत्वपूर्ण हार्मोन का स्तर गिरने लगता है। इस हार्मोनल बदलाव के कारण महिलाओं को हॉट फ्लैशेज, रात में पसीना आना और मूड स्विंग्स जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय शारीरिक और मानसिक सेहत का विशेष ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

हार्मोनल असंतुलन और इसके लक्षण

मेनोपॉज के दौरान शरीर में होने वाले बदलाव केवल पीरियड्स तक सीमित नहीं रहते। हार्मोनल असंतुलन के कारण महिलाओं को अक्सर अनिद्रा, वजन बढ़ना और थकान महसूस होती है। इसके अलावा, हड्डियों की डेंसिटी कम होने लगती है और हृदय रोगों का खतरा भी बढ़ सकता है। त्वचा में रूखापन और बालों का पतला होना भी इसके सामान्य लक्षण हैं। मानसिक स्तर पर चिड़चिड़ापन, तनाव और चिंता महिलाओं की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर सकते हैं।

विशेषज्ञ की सलाह: कैसे बनाएं हार्मोनल बैलेंस?

आरएमएल अस्पताल में महिला रोग विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सलोनी चड्ढा के अनुसार, मेनोपॉज में हार्मोनल संतुलन बनाए रखना स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य है। वे बताती हैं कि असंतुलन से न केवल शारीरिक परेशानियां बढ़ती हैं, बल्कि यह मानसिक स्वास्थ्य को भी नुकसान पहुंचाता है। डॉ. चड्ढा ने सलाह दी है कि महिलाओं को नियमित रूप से हार्मोनल टेस्ट और हेल्थ मॉनिटरिंग करानी चाहिए। सही समय पर की गई जांच शरीर में हो रहे बदलावों को समझने में मदद करती है।

मेनोपॉज में किन आदतों से दूरी है जरूरी?

हार्मोनल संतुलन बनाए रखने के लिए कुछ खास चीजों से परहेज करना चाहिए:

  • अत्यधिक फैटी और प्रोसेस्ड फूड का सेवन तुरंत कम कर दें।
  • ज्यादा मीठा और जंक फूड हार्मोनल गड़बड़ी को बढ़ा सकता है।
  • धूम्रपान और शराब के सेवन से पूरी तरह दूरी बनाएं।
  • हड्डियों को सुरक्षित रखने के लिए कैल्शियम और विटामिन-डी की कमी न होने दें।
  • तनाव कम करने के लिए योग और ध्यान का सहारा लें।

बेहतर सेहत के लिए अपनाएं ये लाइफस्टाइल

मेनोपॉज के लक्षणों को कम करने के लिए एक स्वस्थ जीवनशैली अपनाना सबसे प्रभावी तरीका है। पैदल चलना, योग करना या हल्का वर्कआउट करना शरीर को एक्टिव रखता है। संतुलित और पोषक तत्वों से भरपूर डाइट हार्मोन के स्तर को स्थिर रखने में मदद करती है। पर्याप्त नींद लेना और गहरी सांस लेने वाले व्यायाम (Deep Breathing) तनाव को नियंत्रित करते हैं। रोजमर्रा की आदतों में छोटे बदलाव करके महिलाएं इस संवेदनशील दौर को आसानी से पार कर सकती हैं।

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