Riyadh News: मिडिल ईस्ट में जारी भीषण तनाव के बीच अमेरिकी वायुसेना को बड़ा नुकसान हुआ है। सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर खड़े अमेरिका के पांच रीफ्यूलिंग विमान ईरानी मिसाइल हमले में क्षतिग्रस्त हो गए हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल ने दो अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से शुक्रवार को यह सनसनीखेज जानकारी साझा की। रिपोर्ट के मुताबिक, मिसाइल हमले के वक्त ये विमान जमीन पर खड़े थे। हालांकि ये विमान पूरी तरह नष्ट नहीं हुए हैं, लेकिन इन्हें काफी नुकसान पहुंचा है और फिलहाल इनकी मरम्मत की जा रही है। राहत की बात यह रही कि इस हमले में किसी भी सैनिक की जान नहीं गई।
इराक में दुर्घटनाग्रस्त हुआ KC-135 विमान, 6 सैनिकों की मौत
एक ओर जहां सऊदी अरब में हमला हुआ, वहीं दूसरी ओर पश्चिमी इराक में अमेरिकी सेना का एक बड़ा विमान हादसे का शिकार हो गया। अमेरिकी सेना ने शुक्रवार को पुष्टि की कि दुर्घटनाग्रस्त हुए KC-135 रीफ्यूलिंग विमान में सवार सभी छह क्रू सदस्यों की मौत हो गई है। यह हादसा गुरुवार को हुआ था। सेना ने स्पष्ट किया है कि इस घटना में एक अन्य सैन्य विमान भी शामिल था। हालांकि, शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि यह हादसा किसी दुश्मन या मित्र पक्ष की गोलाबारी (Friendly Fire) की वजह से नहीं हुआ है।
बढ़ता जा रहा है अमेरिकी सैनिकों की मौतों का आंकड़ा
ईरान के खिलाफ 28 फरवरी से शुरू हुए अमेरिकी सैन्य ऑपरेशन्स के बाद से मौतों का सिलसिला थम नहीं रहा है। इराक हादसे में मारे गए छह क्रू सदस्यों के बाद अब मृतक सैनिकों की संख्या बढ़ गई है। इससे पहले अभियानों के दौरान सात अमेरिकी सैनिक पहले ही अपनी जान गंवा चुके थे। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा है कि इस दुखद घटना के पीछे के हालातों की गहराई से जांच की जा रही है। अमेरिका ने ईरान पर दबाव बनाने के लिए मध्य-पूर्व के आसमान में बड़ी संख्या में लड़ाकू और रीफ्यूलिंग विमान तैनात किए हैं।
रुकेंगे नहीं हमले, जारी रहेगा ईरान के खिलाफ अभियान
विमानों के नुकसान और सैनिकों की मौत के बावजूद अमेरिका पीछे हटने को तैयार नहीं है। पेंटागन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने कड़े तेवर दिखाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी एयर स्ट्राइक और सैन्य अभियान जारी रहेंगे। हेगसेथ ने कहा कि युद्ध हमेशा अफरा-तफरी से भरा होता है और इसमें ऐसी दुखद घटनाएं हो सकती हैं। फिलहाल अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी हवाई ताकत को और अधिक सतर्क कर दिया है ताकि भविष्य में होने वाले नुकसान को टाला जा सके।


