National News: नेहरू-गांधी परिवार एक बार फिर गंभीर कानूनी संकट में फंस गया है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट और लखनऊ हाईकोर्ट में चल रहे दो अलग-अलग मामलों ने कांग्रेस पार्टी की चिंताएं बढ़ा दी हैं। यह पूरा मामला सोनिया गांधी और राहुल गांधी की नागरिकता से जुड़ा है। जानकारों का मानना है कि यदि अदालत का फैसला खिलाफ आता है, तो दोनों की संसद सदस्यता जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत तुरंत रद्द हो सकती है। कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए तारीखें तय कर दी हैं।
सोनिया गांधी के वोटर लिस्ट विवाद में बड़ा पेच
सोनिया गांधी के खिलाफ दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में एक गंभीर याचिका दायर है। अधिवक्ता विकास त्रिपाठी का आरोप है कि सोनिया गांधी ने 30 अप्रैल 1983 को भारत की नागरिकता ली थी। लेकिन उनका नाम 1980 की नई दिल्ली की वोटर लिस्ट में पहले से दर्ज था। याचिकाकर्ता ने सवाल उठाया कि बिना भारतीय नागरिक बने किसी विदेशी का नाम वोटर लिस्ट में कैसे आया? क्या इसके लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल हुआ था? सोनिया गांधी की लीगल टीम ने इसे राजनीतिक साजिश बताया है। अब 30 मार्च को होने वाली सुनवाई इस मामले का भविष्य तय करेगी।
राहुल गांधी की ब्रिटिश नागरिकता का क्या है पूरा मामला?
दूसरी ओर, राहुल गांधी की मुश्किलें लखनऊ हाईकोर्ट ने बढ़ा दी हैं। कोर्ट ने भाजपा कार्यकर्ता एस विग्नेश शिशिर की याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार से रिकॉर्ड तलब किए हैं। याचिकाकर्ता का दावा है कि राहुल गांधी के पास ब्रिटिश नागरिकता है और वे ‘रॉल विंची’ नाम से भी सक्रिय रहे हैं। इस मामले में पासपोर्ट एक्ट और ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट के तहत जांच की मांग की गई है। हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा है कि शिकायत पर अब तक क्या कार्रवाई हुई। 19 मार्च को होने वाली सुनवाई राहुल गांधी के भविष्य के लिए अहम हो सकती है।
संवैधानिक नियम और संसद सदस्यता पर खतरा
भारतीय संविधान के अनुसार, कोई भी गैर-भारतीय नागरिक संसद का सदस्य नहीं रह सकता। यदि किसी ने स्वेच्छा से विदेशी नागरिकता ली है, तो वह अयोग्य हो जाता है। सोनिया गांधी के मामले में वोटर लिस्ट की गड़बड़ी साबित होती है या राहुल गांधी की दोहरी नागरिकता के सबूत मिलते हैं, तो उनकी संसद सदस्यता रद्द होना निश्चित है। राहुल गांधी पहले भी एक मामले में सदस्यता खो चुके हैं और सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद वापस लौटे थे।


