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हिमाचल के 95 हजार एनपीएस कर्मचारियों को मिल सकती है बड़ी राहत

हिमाचल प्रदेश के करीब 95 हजार एनपीएस कर्मचारियों को राज्य सरकार बड़ी राहत दे सकती है। इनमें से किसी भी कर्मचारी की असामयिक मृत्यु या अपंगता की स्थिति में उनके परिवार के लिए पुरानी पेंशन योजना के तहत फेमिली पेंशन देने पर सरकार विचार कर रही है। इसके लिए केंद्र सरकार की ओर से हाल ही में बनाए नियमों का अध्ययन किया जा रहा है। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय पेंशन स्कीम के नए नियमों में यह प्रावधान किया है कि अब संबंधित कर्मचारियों के परिजनों को मृत्यु या अपंगता की स्थिति में पुरानी पेशन योजना के मुताबिक ही फेमिली पेंशन दी जाएगी |

शर्त यह होगी कि उन्हें नियुक्ति के दौरान यह स्वेच्छा से लिखित रूप से देना होगा कि मृत्यु या अपंगता की स्थिति में वे कंट्रीब्यूटरी पेंशन लगाना चाहते हैं या पुरानी पेंशन योजना के तहत परिवार पेंशन लगवाना चाहते हैं। हिमाचल में राष्ट्रीय पेंशन स्कीम का हवाला देते हुए अभी तक कंट्रीब्यूटरी पेंशन की व्यवस्था ही है। इसके लिए 10 प्रतिशत अंश कर्मचारी के वेतन और 14 प्रतिशत अंशदान सरकार की ओर से जमा किया जाता है। यह उल्लेखनीय है कि 15 मई 2003 के बाद नियुक्ति पाने वाले कर्मचारियों के लिए केंद्र में पेंशन की यह व्यवस्था बदली गई है। उसके बाद से ही कर्मचारी पुरानी पेंशन की बहाली के साथ पुरानी विधि से ही परिवार पेंशन लगाने का मामला भी उठाते आए हैं। हिमाचल प्रदेश में भी यह मांग पुरजोर तरीके से उठाई जाती रही है।

यहां पुरानी पेंशन पर आंदोलन हुए हैं। विधानसभा के लगभग हर सत्र में यह मामला जाता रहा है। हिमाचल सरकार इसे केंद्रीय नियमों की दुहाई देकर टालती रही है कि जैसा केंद्र में होता है, वैसा ही यहां किया जा रहा है। राज्य में करीब 84 हजार कर्मचारी एनपीएस योजना के दायरे में आते हैं। नियमों में बदलाव पर इसका उन्हें लाभ मिलता है। कंट्रीब्यूटरी पेंशन योजना में राज्य सरकार की ओर से जमा फंड वापस सरकार के पास जमा किया जाएगा, जबकि कर्मचारी की तरफ से जमा भाग  कर्मचारियों को लौटा दिया जाएगा। ऐसा होता है तो पुरानी पेंशन योजना के तहत कर्मचारियों को संतोषजनक पेंशन मिलेगी। हिमाचल प्रदेश सरकार का वित्त विभाग भी इस केंद्रीय अधिसूचना पर केंद्रीय नियमों पर मंत्रणा कर रहा है। जल्दी ही नई व्यवस्था को लागू किया जा सकता है। इसके लिए वित्त विभाग आर्थिक बोझ पर भी मंत्रणा कर रहा है। प्रधान सचिव वित्त प्रबोध सक्सेना ने कहा है कि केंद्र सरकार की ओर से तैयार किए गए नए नियम अभी विचाराधीन है। इनका अध्ययन किया जा रहा है। 

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