दुनिया में इस समय सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री संकट में है। 450 अरब डॉलर का ये उद्योग वैश्विक मांग को पूरा करने में अक्षम हो गया है। ये बात हैरतअंगेज, लेकिन सच है कि इस संकट का प्रमुख कारण डिस्प्ले ड्राइवर की कमी है, जिसकी कीमत आम तौर पर महज एक डॉलर होती है। लेकिन आज यह बेशकीमती हो गई है। सेमीकंडक्टर कारोबार के जानकारों के मुताबिक सेमीकंडक्टर अलग-अलग प्रकार के सैकड़ों चिप्स से मिल कर बनता है। अभी सबसे अच्छी गुणवत्ता के चिप की सप्लाई फिलहाल क्वालकॉम इंक और इंटेल कॉर्प कंपनियां कर रही हैं। इन चिप्स के जरिए ही कंप्यूटर और स्मार्टफोन चलते हैं। इनके बीच डिस्प्ले ड्राइवर की भूमिका फोन, मॉनिटर या नेविगेशन सिस्टम में बेसिक इन्फॉर्मेशन की सूचना स्क्रीन को देने को होती है। यानी ये जो सूचनाएं पहुंचाते हैं, वही हम स्क्रीन पर देखते हैं।

आज सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री की मूल समस्या यही है कि इस समय डिस्प्ले ड्राइवरों की पूरी सप्लाई नहीं हो पा रही है। जो कंपनियां इन्हें बनाती हैं, वे बढ़ी मांग की पूर्ति नहीं कर पा रही हैं। इससे डिस्प्ले ड्राइवर चिप की कीमतों में भारी उछाल आ गया है। इसी कारण लिक्विड क्रिस्टल डिस्प्ले पैनल्स की कीमत भी बढ़ गई है, जिनका इस्तेमाल टेलीविजन, लैपटॉप, कार और विमानों के उत्पादन में होता है।

अति आधुनिक रेफ्रिजटरों में भी इनका उपयोग होने लगा है। सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री को कवर करने वाली पत्रकार स्टैसी रैसगॉन ने टोक्यो के अखबार जापान टाइम्स को बताया- ‘ऐसा नहीं है कि इसके बिना आप किसी तरह काम चला लें। अगर आपके पास सब कुछ है, लेकिन डिस्प्ले ड्राइवर नहीं है, तो आप अपना उत्पाद नहीं बना सकते।’

अब हाल में बिजली प्रबंधन (पॉवर मैनेजमेंट) चिप्स की भी वैश्विक बाजार में कमी हो गई है। इसका खराब असर भी विश्व अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। इसकी वजह से फोर्ड मोटर कंपनी, निशान मोटर कंपनी, फॉक्सवैगन एजी आदि जैसी कंपनियों को अपने उत्पादन में कटौती करनी पड़ी है। एक अनुमान के मुताबिक इस चिप की सप्लाई में कमी के कारण दुनिया में कार उद्योग इस साल 60 अरब डॉलर का नुकसान हो चुका है।

जानकारों का कहना है कि इसके पहले की स्थिति सुधरे, हालात और बिगड़ सकते हैं। अमेरिकी राज्य टेक्सास में पिछले दिनों आए बर्फीले तूफान के कारण वहां उत्पादन अभी तक सामान्य नहीं हो पाया है। इसी तरह जापान में एक फैक्टरी में आग लग जाने के कारण महीने भर से उत्पादन ठहरा हुआ है। इसे देखते हुए सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी ने पिछले दिनों उद्योग जगत में गंभीर असंतुलन पैदा होने की चेतावनी दी थी। उधर ताइवान की सेमीकंडक्टर मैनुफैक्चरिंग कंपनी ने कहा था कि अपनी फैक्टरियों को सौ फीसदी क्षमता से चलाने के बावजूद वह मांग को पूरा करने की स्थिति में नहीं है।

डिस्प्ले ड्राइवर बनाने वाली कंपनी हिमैक्स के सीईओ जॉर्डन वू ने कहा है कि उन्होंने पिछले 20 साल में ऐसी हालत नहीं देखी, जब हर उपकरण की सप्लाई मांग से कम हो रही हो। जानकारों का कहना है कि पिछले साल कोरोना महामारी फैलने पर कंपनियों ने गलत अनुमान लगाया, जिसकी कीमत आज चुकानी पड़ रही है। कंपनियों ने तब अंदाजा लगाया था कि मुश्किल वक्त आने के कारण मांग घट जाएगी। इस कारण उन्होंने उत्पादन घटा दिया। लेकिन असल में चिप्स की मांग पहले जैसी बनी रही।

बाजार में सप्लाई के कारण बीते एक अप्रैल को कंप्यूटर उपकरण बनाने वाली जापान की कंपनी आई-ओ डेटा डिवाइस इंक ने अपने एलसीडी मॉनिटर की कीमत में अब तक की सबसे बड़ी बढ़ोतरी करने का एलान किया। उसने कहा कि इस मॉनिटर को बनाने में इस्तेमाल होने वाली हर चीज की कीमत बढ़ गई है, इसलिए दाम बढ़ाने के अलावा उसके पास कोई और चारा नहीं था।

हिमैक्स कंपनी की बिक्री में भी वृद्धि हुई है। इस कारण शेयर बाजार में उसके शेयरों के भाव पिछले नवंबर से अब तक तीन गुना बढ़ चुके हैँ। इसके बावजूद इस कंपनी से सीईओ खुश नहीं हैं। उन्होंने कहा कि बिजनेस इस सिद्धांत पर खड़ा होता है कि ग्राहक जो मांगे उसे पूरा किया जाए। इसमें खुद को अक्षम पाना परेशान करने वाला अनुभव है। उन्होंने यह भी कहा कि अभी वह स्थिति नहीं आई है, जहां से संकट का अंत दिखता हो।

By RIGHT NEWS INDIA

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