Himachal News: हिमाचल प्रदेश के हजारों सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने अपने अधिकारों के लिए सरकार के खिलाफ बिगुल फूंक दिया है। कॉर्पोरेट सेक्टर के इन पेंशनरों ने मंडी में एक राज्य स्तरीय बैठक की। इसमें पेंशन बहाली और रुके हुए वित्तीय लाभों को लेकर आर-पार की लड़ाई का फैसला लिया गया है। पेंशनरों ने साफ कर दिया है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन तेज होगा। संगठन ने सरकार तक अपनी बात पहुंचाने के लिए एक नई रणनीति तैयार की है।
नई कार्यकारिणी का हुआ गठन
इस महाअधिवेशन में पुरानी कमेटियों को भंग कर दिया गया। अब ‘हिमाचल प्रदेश कॉर्पोरेट सेक्टर पेंशनर्स संयुक्त फ्रंट’ नाम से नया मोर्चा बनाया गया है। बी.एस. चौहान को सर्वसम्मति से इसका प्रदेश अध्यक्ष चुना गया है। उनके साथ जोगिंदर सारटा को वरिष्ठ उपाध्यक्ष और एन.के. बाली को महासचिव की जिम्मेदारी मिली है। संगठन की आवाज बुलंद करने के लिए कमलेश शांडिल को मुख्य प्रवक्ता बनाया गया है। यह नई टीम हिमाचल प्रदेश के हर जिले में जाकर सेवानिवृत्त कर्मचारियों को एकजुट करेगी।
6730 परिवारों का बुढ़ापा खतरे में
पेंशनरों का दर्द बहुत गहरा है। यह पेंशन व्यवस्था 1 अप्रैल 1999 को शुरू हुई थी। लेकिन 30 नवंबर 2004 के बाद रिटायर होने वाले कर्मचारियों के लिए इसे बंद कर दिया गया। इससे लगभग 6,730 परिवारों का भविष्य अधर में लटक गया है। दुखद पहलू यह है कि अपने हक का इंतजार करते-करते 627 पेंशनर दुनिया छोड़ चुके हैं। अभी सिर्फ 1999 से 2004 के बीच रिटायर हुए लोगों को ही इसका लाभ मिल रहा है। बाकी हजारों लोग आज भी खाली हाथ हैं।
सीएम सुक्खू से मिलेगी नई टीम
नवनियुक्त अध्यक्ष बी.एस. चौहान ने कहा कि पेंशन कोई खैरात नहीं, बल्कि उनका संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि सीएम ने वादा किया था कि वे पेंशनरों का दर्द समझते हैं। सीएम ने खुद को पेंशनर परिवार का बेटा बताया था। संगठन को उम्मीद है कि सरकार ओपीएस की तरह उनकी मांग भी पूरी करेगी। अब यह संयुक्त मोर्चा 18 से 20 जनवरी के बीच मुख्यमंत्री से मिलेगा। इस मुलाकात की अगुवाई पेंशनर नेता आत्मा राम करेंगे। हिमाचल प्रदेश के ये बुजुर्ग अब सरकार से ठोस फैसले की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

