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60 साल पहले आज ही के दिन बदली भारत की किस्मत: जब ‘आयरन लेडी’ ने रचा इतिहास, सन्न रह गई थी दुनिया!

New Delhi News: भारतीय लोकतंत्र के लिए आज 19 जनवरी का दिन बेहद खास है। ठीक 60 साल पहले इसी तारीख को देश को पहली महिला प्रधानमंत्री मिली थी। इंदिरा गांधी ने 48 साल की उम्र में सत्ता की कमान संभाली थी। यह ऐतिहासिक फैसला चार घंटे चले हाई-लेवल ड्रामे के बाद लिया गया था। आज पूरा देश उस पल को याद कर रहा है। उस दिन पहली बार एक महिला ने दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का नेतृत्व किया।

शास्त्री जी के निधन के बाद उपजा राजनीतिक संकट

जनवरी 1966 में ताशकंद में लाल बहादुर शास्त्री का अचानक निधन हो गया था। इस खबर से पूरा देश स्तब्ध रह गया। शासन चलाने के लिए तत्काल गुलजारी लाल नंदा को कार्यकारी प्रधानमंत्री बनाया गया। उस समय इंदिरा गांधी शास्त्री सरकार में सूचना मंत्री की जिम्मेदारी निभा रही थीं। कांग्रेस के भीतर नए नेता को लेकर गहन मंथन शुरू हुआ। अंततः 16 में से 11 मुख्यमंत्रियों ने इंदिरा के नाम पर अपनी सहमति जताई।

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मोरारजी देसाई की चुनौती और वोटिंग का रोमांच

इंदिरा गांधी के लिए प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचना आसान नहीं था। दिग्गज नेता मोरारजी देसाई भी इस पद के मजबूत दावेदार थे। कांग्रेस के ‘किंगमेकर’ कहे जाने वाले के. कामराज ने आपसी सहमति बनाने की बहुत कोशिश की। हालांकि मोरारजी देसाई चुनाव लड़ने के अपने फैसले पर अड़े रहे। इसके बाद 19 जनवरी 1966 को संसद में गुप्त मतदान का फैसला हुआ। उस समय 526 सांसदों ने इस ऐतिहासिक वोटिंग में हिस्सा लिया था।

भारी बहुमत से मिली जीत और संसद में गूंज

मतदान के नतीजे शाम करीब 3 बजे घोषित किए गए। चुनाव में इंदिरा गांधी को 355 वोट मिले। वहीं मोरारजी देसाई केवल 169 वोट ही जुटा पाए। जीत की घोषणा होते ही पूरी संसद तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठी। सफेद साड़ी और भूरे रंग की शॉल ओढ़े इंदिरा ने संसद में प्रवेश किया। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रपति राधाकृष्णन से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया। इस जीत की खबर देश भर में आग की तरह फैल गई।

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‘गूँगी गुड़िया’ से ‘आयरन लेडी’ तक का सफर

राजनीति इंदिरा गांधी को विरासत में मिली थी। वे पंडित जवाहरलाल नेहरू की इकलौती संतान थीं। शुरुआत में विपक्ष उन्हें ‘गूँगी गुड़िया’ कहकर तंज कसता था। लेकिन समय के साथ उन्होंने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय दिया। उन्होंने पाकिस्तान के दो टुकड़े कर बांग्लादेश बनवाया। साथ ही उन्होंने देश में इमरजेंसी जैसे कड़े और साहसी फैसले लिए। उनकी निडरता ने उन्हें विश्व स्तर पर ‘आयरन लेडी’ की नई पहचान दिलाई।

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