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दुनिया को 50 करोड़ टीको की मदद काफी नही- राजा कृष्णमूर्ति, अमेरिकन सांसद

भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने कहा है कि दुनिया को कोविड-19 रोधी टीके की 50 करोड़ खुराकें दान करना ही काफी नहीं है बल्कि अमेरिका को महामारी के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में और अधिक योगदान देना चाहिए. इंग्लैंड में जी7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने से पहले बाइडेन ने दुनियाभर में कोविड-19 के खिलाफ जंग में तेजी लाने के लिए गुरुवार को 50 करोड़ खुराकें दान करने का वादा किया था.

बाद में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा कि जी7 देश अन्य देशों को टीके की कम से कम एक अरब खुराकें देने के लिए प्रतिबद्ध हैं. कृष्णमूर्ति ने कहा कि मुझे खुशी है कि अमेरिका वैश्विक टीकाकरण के प्रयासों में मदद के लिए 50 करोड़ खुराकें खरीदेगा जिसमें से 20 करोड़ खुराकें 2021 के अंत तक दी जाएंगी लेकिन यह काफी नहीं है.

अब तक का सबसे बड़ा दान

उन्होंने कहा कि यह एक बड़े उद्देश्य में महज एक पहला कदम है और महामारी को खत्म करने के लिए हमें निश्चित रूप से टीकों का उत्पादन बढ़ाना चाहिए तथा लाखों खुराकों की आपूर्ति करनी चाहिए. बाइडेन ने घोषणा की है कि अमेरिका एक बड़ा कदम उठा रहा है जो कोविड-19 महामारी के खिलाफ वैश्विक लड़ाई को अधिक प्रभावी बनाएगा.

उन्होंने कहा कि अमेरिका कोविड-19 रोधी टीकों की 50 करोड़ खुराकें फाइजर से खरीदेगा और महामारी के खिलाफ जंग में इन्हें जरूरतमंद 100 देशों को देगा. अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि यह एक ऐतिहासिक कदम है. किसी एक देश द्वारा यह अब तक सबसे अधिक मात्रा में टीकों का दान है.

2021 में दी जाएंगी 20 करोड़ खुराकें

राष्ट्रपति ने कहा कि अगस्त से इन टीकों को जरूरतमंद देशों को भेजा जाएगा. इस साल तक 20 करोड़ खुराकों की आपूर्ति की जाएगी और 30 करोड़ खुराकें 2022 में दी जाएंगी. उन्होंने दावा किया कि अमेरिका दुनिया भर में कोविड-19 रोधी टीके की आपूर्ति की वैश्विक पहल कोवैक्स के तहत किसी भी देश से कहीं अधिक योगदान कर रहा है.

वहीं अमेरिका के शीर्ष सांसदों ने राष्ट्रपति जो बाइडेन के प्रशासन से भारत को अतिरिक्त टीके देने का अनुरोध किया है. सांसदों ने कहा था कि भारत अमेरिका का एक रणनीतिक सहयोगी है और उसे कोविड-19 के खिलाफ अपनी लड़ाई में देश की मदद की आवश्यकता है. सांसदों ने यह भी कहा कि मित्रों और सहयोगियों की मदद करते वक्त यह भी सुनिश्चित होना चाहिए कि अमेरिका की बौद्धिक संपदा और नवोन्मेष की रक्षा हो.


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