Himachal News: शिमला के रामपुर स्थित अदालत ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश किन्नौर ने स्टेट सप्लाई कारपोरेशन के एक कर्मचारी को दोषी करार दिया है। अदालत ने उसे पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। यह मामला हिमाचल न्यूज़ (Himachal News) में चर्चा का विषय बना हुआ है। दोषी कर्मचारी ने काजा डिपो में लाखों रुपये का गबन किया था। कोर्ट ने उस पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। वहीं, सबूतों की कमी के चलते एक अन्य आरोपी को बरी कर दिया गया है।
सरकारी तेल बेचने में की थी लाखों की हेराफेरी
भ्रष्टाचार का यह मामला साल 2008-09 के दौरान सामने आया था। दोषी ने काजा केरोसिन डिपो में नियमों की धज्जियां उड़ाई थीं। उसने सरकारी विभागों को पेट्रोल, डीजल और केरोसिन उधार पर बेच दिया। यह काम कारपोरेशन के निर्देशों के बिल्कुल खिलाफ था। जब स्टॉक का फिजिकल वेरिफिकेशन हुआ, तो भारी गड़बड़ी मिली। जांच में सामने आया कि डिपो से लाखों का माल गायब है। हिमाचल न्यूज़ के मुताबिक, इस घोटाले ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए थे।
जांच में खुला 44 लाख के गबन का राज
गड़बड़ी मिलने पर कारपोरेशन के प्रबंध निदेशक ने सख्त कदम उठाए। उन्होंने स्टॉक और बिक्री रिकॉर्ड की जांच के लिए एक विशेष समिति बनाई। समिति ने अपनी रिपोर्ट में 44 लाख रुपये से ज्यादा के गबन का खुलासा किया। इसके बाद अप्रैल 2010 में काजा पुलिस थाने में केस दर्ज करवाया गया। पुलिस ने जांच पूरी कर अदालत में चार्जशीट दाखिल की। अब सालों बाद अदालत ने दोषी को सलाखों के पीछे भेज दिया है। जुर्माना न भरने पर दोषी को छह महीने की अतिरिक्त जेल काटनी होगी।
