इंडोनेशिया के पूर्वी हिस्से में मूसलाधार बारिश के कारण हुए भूस्खलन और भीषण बाढ़ आने से अभी तक 41 लोगों की मौत हो गई । कुदरत के इस कहर से हजारों लोग बेघर हो गए हैं और 27 से ज्यादा लोग लापता हैं। स्थानीय आपदा एजेंसी की प्रमुख लेन्नी ओला ने बताया कि पूर्वी नूसा तेंग्गरा प्रांत के एडोनारा द्वीप के लमेनेले गांव के दर्जनों घरों पर आधी रात के बाद आसपास की पहाड़ियों से भारी मात्रा में मिट्टी और पहाड़ गिरने लगे। लोग जबतक कुछ समझ पाते उससे पहले ही कई घर पानी में बह गए। आधी रात से ही रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया।

मृतकों की बढ़ सकती है संख्या
रविवार की दोपहर तक 35 शवों को बाहर निकाला जा चुका है। इस भीषण प्रकोप में कई लोग मलबे की चपेट में भी आ गए हैं। उन्हें भी निकालने का काम चल रहा है। एजेंसी की प्रमुख ओला ने बताया कि बचावकर्ताओं ने 35 शवों और कम से कम पांच घायलों को निकाला है। राष्ट्रीय आपदा न्यूनीकरण एजेंसी के मुताबिक, अन्य स्थानों पर बाढ़ के कारण कम से कम छह लोगों की मौत हुई है। इंडोनेशिया की आपदा एजेंसी ने मृतकों की संख्या अभी बढ़ सकती है। क्योंकि मलबे से लोगों को निकालने का काम चल रहा है। एजेंसी ने बताया कि कम से कम 27 लोग अब भी लापता हैं। उनकी तलाश जारी है। 

मलबे में दबे लोगों को बाहर निकालकर अस्पताल में भर्ती कराया गया
ओला ने बताया कि ओयांग बयांग गांव में बाढ़ में 40 घर तबाह हो गए हैं और सैकड़ों घर पानी में डूब गए हैं और कुछ घर तो सैलाब में बह गए हैं। उन्होंने बताया कि वैबुराक नाम के अन्य गांव में रात में भारी बारिश के बाद नदी में बाढ़ आने से तीन लोगों की मौत हो गई तथा सात अन्य लापता हैं। बाढ़ का पानी पूर्वी फ्लोरेस जिले के बड़े हिस्से में घुस गया है। चार घायलों का इलाज स्थानीय अस्पताल में किया जा रहा है। राष्ट्रीय आपदा न्यूनीकरण एजेंसी के प्रवक्ता रादित्य जाती ने बताया कि सैकड़ों लोग बचाव अभियान में लगे हुए हैं, लेकिन बिजली कटने, सड़कें बाधित होने और दूरदराज़ के इलाके होने के चलते सहायता एवं राहत पहुंचाने में दिक्कत आ रही है।

10 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया
एजेंसी की ओर से जारी तस्वीरों में दिख रहा है कि बचावकर्ता, पुलिस व सैन्य कर्मी लोगों को आश्रय स्थलों की ओर ले जा रहे हैं, जबकि सड़कों पर मलबा पड़ा हुआ है। एजेंसी ने बताया कि पड़ोसी प्रांत पश्चिम नूसा तेंग्गरा के बीमा शहर में भी भीषण बाढ़ की रिपोर्ट मिली है, जिस वजह से करीब 10 हजार लोगों को अपने घरों को छोड़ना पड़ा है।

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