400 कमाने वाले का कर दिया 500 का चालान

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हिमाचल में गरीबों को कानून के नाम पर प्रताड़ित करने के मामले जरूरत से ज्यादा होते है। गरीब चाहे शिकायत लेकर जाए तो भी कोई नही सुनता। अगर कोई आवाज उठाए तो भी किसी के कान पर जूं नही रेंगती। कुछ ऐसा ही हुआ है धर्मशाला में; मास्क ना लगाने के लिए मजदूर का 500 रुपये का चालान कर दिया गया। जबकि मजदूर की दिहाड़ी 400 रुपये है। जबकि सर्वविदित है कि पिछले चार या पांच महीनों से ना तो मजदूरों को कोई नही मिला है और मजदूरों की हालत दयनीय हो चुकी है। खाने खाने को पैसे नही लेकिन मास्क लगाओ। चलिए चेक करते है कुछ फैक्ट्स:

• क्या मास्क लगाने से कोरोना रुक रहा है या नहीं? डब्ल्यूएचओ पहले ही बता चुका है कि मास्क से कोरोना नही रुकता।

• जहां मास्क उतार कर  लोग बर्गर, चाऊमीन, पिज़्ज़ा, गोलगप्पे आदि खा रहें हैं; क्या वहां कोरोना नहीं है।

• मास्क उतार कर लोग शॉपिंग कर रहें है; क्या वहां कोरोना नहीं है।

• मास्क उतार कर नेता बड़ी-बड़ी रैलियों को संबोधित कर रहे है; क्या वहां कोरोना नहीं है।

• भर-भर कर बसों में लोग सफर कर रहें हैं; क्या वहां कोरोना नहीं है

• शराब के ठेके और बार तक खुलें हैं; वहां कोरोना नहीं है।

जहां से सरकार या नेताओं को फायदा हो रहा है वहां किसी तरह का कोई प्रतिबंध नही है। जबकि नेताओं, मंत्रियों और विधायकों समेत मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश कोरोना पॉजिटिव रह चुके है। लेकिन एक गरीब जब सड़क अपर मजदूरी करने निकालता है तो उससे कोरोना का खतरा हो जाता है। पुलिस मानवीयता भूल कर मुशीबत के मारे मजदूर का चालान कर देती है। किसी को फर्क नही पड़ता कि रात को उस मजदूर के बच्चे क्या खाएंगे और कैसे भूखे पेट रात गुजरेंगे।

इन लोगों की यह खून पसीने की कमाई है, अगर आप कोई मदद नहीं कर सकते, रोजगार पैदा नहीं कर सकते, तो कम से कम इनकी खून पसीने की कमाई को मत छीने।

चालान की कॉपी

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