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बीबीएन में जीएसटी की चोरी करने पर 32 कारोबारियों पर लगाया 25 लाख रुपए जुर्माना

राज्य कर एवं आबकारी विभाग की बीबीएन टीम ने जीएसटी की चोरी करने पर 32 कारोबारियों को करीब 25 लाख रुपए का जुर्माना किया है। ये लोग बिना ई-वे बिल के माल की आपूर्ति कर रहे थे। नियमों के मुताबिक राज्य के अंदर या फिर दूसरे राज्यों को 50 हजार रुपए या इससे ज्यादा के माल की आपूर्ति करने के लिए ई-वे बिल अनिवार्य है। हैरानी की बात है कि व्यापारी व उद्योग ई-वे बिल भरने से बचकर प्रदेश के राजस्व को चूना लगा रहे हैं। विभाग लगातार इस तरह के मामले पकड़ रहा है। इसके बावजूद व्यापारी व उद्योग ई-वे बिल भरने से बच रहे हैं। जीएसटी के तहत ही ई-वे बिल की प्रणाली शुरू हुई है।

ई-वे बिल माल की आपूर्ति या परिवहन के दौरान जारी किया जाता है। यह बिल आपूर्पिकत्र्ता द्वारा जारी किया जाता है।

विभाग द्वारा पिछले कुछ समय से ऐसे कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है जो टैक्स चोरी कर सरकारी राजस्व को चूना लगा रहे हैं। कुछ कारोबारी प्रदेश में ही नहीं बल्कि दूसरे राज्यों से बिना ई-वे बिल के माल लेकर आ रहे हैं। वर्ष 2019 में बीबीएन ने टारगेट से 111 करोड़ रुपए अधिक राजस्व में जमा किए थे। इसको लेकर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने उस समय इस आबकारी जिले की खूब प्रशंसा की थी। यही कारण है कि पिछले कुछ वर्षों में टैक्स वसूली में यह जिला पूरे प्रदेश में अव्वल है।

विभाग की यह कार्रवाई लगातार चली हुई है। जून महीने में ही विभाग ने इस तरह के 7 और मामले पकड़े हैं। इन 7 कारोबारियों को विभाग ने 5.81 लाख रुपए का जुर्माना किया है। सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें कुछ मामले ई-वे बिल के अलावा बिना बिल के माल बेचने व खरीदने के भी पकड़े गए हैं। राज्य कर एवं आबकारी विभाग बीबीएन के उपायुक्त वरुण कटोच ने बताया कि विभाग की टीम टैक्स चोरी करने वालों के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई कर रही है। इसी का ही परिणाम है कि पिछले कुछ समय में टैक्स चोरी के मामले कम हुए हैं। विभाग ने बिना ई-वे बिल के माल की आपूर्ति करने पर 32 मामले पकड़े हैं जिसमें करीब 25 लाख रुपए का जुर्माना किया गया है। भविष्य में भी इस प्रकार की कार्रवाई जारी रहेगी।


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