अध्यापिका का जनून, माइन्स तापमान और बर्फ के बीच बच्चों को घर घर जाकर पढ़ाया

हिमाचल प्रदेश के जनजातीय क्षेत्र लाहौल घाटी में कोरोना काल में तीन अध्यापिकाओं ने बेहतरीन सेवाएं दी हैं। इनमें से एक अध्यापिका को मंत्री रामलाल मारकंडा सम्मानित कर चुके हैं। लेकिन दो अध्यापिकाओं को उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए सम्मानित नहीं किया। ऐसे में इन अध्यापिकाओं को पुरस्कृत करने की मांग उठने लगी है। लाहौल-स्पीति जिला परिषद अध्यक्ष रमेश रूअलवा, लाहौल पंचायत प्रधान संघ अध्यक्ष सत प्रकाश, जिप सदस्य छिमेद लामो तथा पूर्व प्रधान ग्राम पंचायत तांदी सुरेश कुमार ने अध्यापिकाओं को सम्मानित करने की पैरवी की है।

उपायुक्त पंकज राय ने कहा कि घाटी में शिक्षा के क्षेत्र में बेहतरीन सेवाएं देने वाली अध्यापिकाओं को सम्मानित करने की तकनीकी शिक्षा मंत्री से सिफारिश की जाएगी। दोनों अध्यापिकाओं ने सरकार के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए विद्यार्थियों के हित में अपना स्टेशन तक नहीं छोड़ा। इनमें से राजकीय प्राथमिक स्कूल शकोली की अध्यापिका को तकनीकी शिक्षा मंत्री रामलाल मारकंडा स्नो फेस्टिवल में सम्मानित भी कर चुके हैं।

शकोली पाठशाला में तैनात अध्यापिका किरण लता ने घर-घर जाकर बच्चे पढ़ाए। घाटी में अधिकतर जगह पर इंटरनेट सेवाएं सुचारु न होने से ऑनलाइन पढ़ाई नहीं हो पाई। ऐसे में राजकीय प्राथमिक पाठशाला मेह में तैनात जेबीटी अध्यापिका छेरिंग डोलमा ने कोरोना काल में सात बच्चों के लिए रारिक स्थित अपने घर पर ही कक्षाएं जारी रखीं।

राजकीय आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला जाहलमा में तैनात हिंदी प्रवक्ता अनिता देवी ने भी घर-घर जाकर कार्य तथा अभिभावकों से बच्चों की गतिविधियों को जानती रहीं। दिसंबर माह में भी ऑफलाइन परीक्षा में भारी बर्फबारी में कदमताल कर बच्चों के घर तक प्रश्न पत्र पहुंचाएं।

इसके बाद भी उनको अभी तक सम्मानित नहीं किया गया। गौरतलब है कि कोरोना महामारी के चलते प्रदेश में करीब 11 माह तक स्कूल बंद रहे। इस दौरान घाटी में अध्यापिकाओं ने सराहनी और उत्कृष्ट सेवाएं दीं। लाहौल-स्पीति जिले के उपायुक्त पंकज राय ने शिक्षिका छेरिंग डोलमा, किरण लता और अनीता देवी के कार्यों की सराहना की है। 

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