देश के 45 साल उम्र से ज्यादा के 25 करोड़ लोग कुपोषण के शिकार

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने लोगों के हेल्थ से जुड़ी रिपोर्ट जारी की है। इसका नाम बॉडी मास इंडेक्स (BMI) है, यानी उम्र और लंबाई के हिसाब से आपका वजन कितना होना चाहिए।

रिपोर्ट बताती है कि देश में लोगों को खाने-पीने में उचित पोषक तत्व (न्यूट्रिएंट) मिल रहे हैं या नहीं। अब बात आंकड़ों की, जो हैरान करने वाले हैं। देश में 45 साल या उससे ऊपर की करीब आधी आबादी(49%) ऐसी है, जो अंडर-न्यूट्रिएंट है या ओवर-वेट है। देश में ऐसे लोगों की कुल संख्या करीब 25 करोड़ है।

ग्रामीण लोगों और महिलाओं की सेहत ज्यादा खराब है। जिन लोगों में न्यूट्रिएंट की कमी है, उनमें से ज्यादातर लोग गांवों में रहते हैं। महिलाएं, पुरुषों की तुलना में ज्यादा ओवरवेट हैं।

भोपाल में डाइटीशियन डॉक्टर निधि पांडे कहती हैं ओवर-वेट और कुपोषित होना दोनों खतरनाक है। कुपोषित होने की कई वजह होती हैं, गरीबी उनमें सबसे बड़ी है, जबकि ओवर-वेट होने की बस एक वजह है और वह खाने-पीने में लापरवाही है।

बॉडी मास इंडेक्स ​​​​यानी ​​​BMI, यह एक तरह का वेट इंडेक्स है, जो स्वास्थ्य मंत्रालय जारी करता है। BMI को व्यक्ति के हाइट और वेट के हिसाब से निकाला जाता है। जिससे यह पता चलता है कि हाइट के हिसाब से हमारा वेट कितना होना चाहिए। महिला और पुरुषों में यह अलग-अलग होता है।

मुंबई में न्यूट्रिएंट स्पेशलिस्ट देवेश भार्गव कहते हैं कि कुपोषण की सबसे बड़ी वजह गरीबी जरूर है, लेकिन यह आखिरी नहीं है। कम पढ़ाई-लिखाई और जागरूकता की कमी भी बहुत बड़ी वजह है। लोगों को पता ही नहीं होता कि सरकार क्या पहल कर रही है और वे उसका कैसे लाभ उठाएं।

खाद्य सुरक्षा के तहत देश में सरकार सभी को बेसिक खाने का सामान उपलब्ध करा रही है। सामुदायिक केंद्रों पर न्यूट्रिएंट से जुड़ीं दवाइयों और इंजेक्शन की मुफ्त व्यवस्था है। हेल्थ चेकअप की भी मुफ्त व्यवस्था है। यहां कोई भी अपना वेट और ब्लड टेस्ट करा सकता है।

डॉ. निधि कहती हैं कि कुछ लोग ओवर डाइट लेते हैं, कुछ लोग बिल्कुल फिजिकल एक्टिविटी नहीं करते और कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो सबकुछ जानते हैं, फिर भी लापरवाही करते हैं। इसके चलते देश में ओवरवेट यानी मोटापे की समस्या बढ़ती जा रही है।