स्वास्थ्य मौलिक अधिकार; कोरोना का इलाज सस्ता करे भारत सरकार

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को ऐतिहासिक टिप्पणी करते हुए स्वास्थ्य को मौलिक अधिकार बताया। कोर्ट ने कहा कि राइट टु हेल्थ मौलिक अधिकार है। सरकार सस्ते इलाज की व्यवस्था करे। जो लोग कोरोना से बच रहे है वो आर्थिक तौर पर खत्म हो रहे हैं। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने केंद्र और सभी राज्य सरकारों को सख्ती से कोरोना गाइडलाइंस का पालन करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कोरोना अस्पतालों के फायर सेफ्टी को भी सुनिश्चित करने को कहा।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देशभर के राज्य और केंद्रशासित प्रदेश कोविड गाइडलाइंस का सख्ती से पालन करें। कोर्ट ने सरकारों को सभी कोरोना अस्पतालों के फायर सेफ्टी को सुनिश्चित करने को कहा। हाल ही में गुजरात के एक कोरोना अस्पताल में आग लगने से मरीजों की मौत को कोर्ट ने गंभीरता से लिया था। कोर्ट ने कहा कि जो अस्पताल अभी तक फायर एनओसी नहीं लिए हैं, वे तत्काल ले लें। अगर 4 हफ्ते के भीतर फायर एनओसी नहीं लेते हैं तो राज्य सरकार उनके खिलाफ ऐक्शन ले। कोर्ट ने फायर सेफ्टी के लिए हर राज्य को एक नोडल ऑफिसर नियुक्त करने को कहा है जो अस्पताल में फायर सेफ्टी का ऑडिट करेगा।

इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिशानिर्देशों और मानक संचालन प्रक्रियाओं (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) के लागू नहीं होने से कोविड-19 महामारी ‘जंगल की आग’ की तरह फैल गई है। कोर्ट ने कहा कि अभूतपूर्व महामारी के कारण दुनियाभर में हर कोई किसी न किसी तरीके से प्रभावित हो रहा है। यह कोविड-19 के खिलाफ विश्व युद्ध है। टॉप कोर्ट ने यह भी कहा कि कर्फ्यू या लॉकडाउन लागू किए जाने के किसी भी फैसले की घोषणा पहले से की जानी चाहिए ताकि लोग अपनी आजीविका के लिए व्यवस्था कर सकें

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लगातार आठ महीने से काम कर रहे अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्यकर्मी थक गए हैं, उन्हें आराम देने के लिए किसी व्यवस्था की जरूरत है। साथ ही राज्यों को सतर्कतापूर्वक कार्रवाई करनी चाहिए और केंद्र के साथ सौहार्दपूर्ण तरीके से मिलकर काम करना चाहिए, नागरिकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।