किसान आंदोलन; आज सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई, अहम फैसले की उम्मीद

कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों के आंदोलन का आज 22वां दिन है। कंपकंपाती ठंड में भी किसान अपनी जिद पर अड़े हैं, किसान संगठनों की मांग है कि तीनों नए कृषि कानूनों को वापस लिया जाए। लेकिन, केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि कानून वापस नहीं होगा। सरकार और किसान नेताओं के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं निकला है।

किसानों का यह आंदोलन अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने किसान आंदोलन पर सुनवाई की थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मसले पर सरकार और किसानों के बीच समझौता कराने की पहल की है जिसके लिए एक कमेटी का गठन किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट में आज फिर इस पर फिर सुनवाई होनी है, जिसपर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।

Supreme Court will hear today a batch of pleas seeking a direction to the authorities to immediately remove the farmers who are protesting at several border points of Delhi against three new farm laws. pic.twitter.com/d7XHiSuBLW Also Read – Kisan Andolan: सिंधु बॉर्डर पर किसान आंदोलन के समर्थन में संत बाबा राम सिंह ने गोली मारकर खुदकुशी की
— ANI (@ANI) December 17, 2020

अपनी सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि ये राष्ट्रीय स्तर का मसला है, ऐसे में इसमें आपसी सहमति होनी जरूरी है। अदालत की ओर से दिल्ली की सीमाओं और देश के अन्य हिस्सों में प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों की लिस्ट मांगी गई, जिससे पता चल सके कि बात किससे होनी है। सुप्रीम कोर्ट आज DMK के तिरुचि सिवा, आरजेडी के मनोज झा और छत्तीसगढ़ कांग्रेस के राकेश वैष्णव की अर्जी पर सुनवाई करेगी। इनकी मांग है कि कृषि कानूनों को रद्द किया जाए।

संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य एवं स्वराज इंडिया पार्टी के नेता योगेंद्र यादव ने ट्वीट कर कहा है कि, ‘सुप्रीम कोर्ट यह फैसला कर सकता है कि ये कानून संवैधानिक है, या नहीं। लेकिन इनसे किसानों का हित होगा या नहीं, यह एक कानूनी मामला नहीं है। इसे किसानों और जनप्रतिनिधियों को ही सुलझाना होगा। समझौता करवाना अदालत का काम नहीं है। कमेटी के विचार (समिति गठित करने के प्रस्ताव) को किसान संगठन एक दिसंबर को ही खारिज कर चुके हैं।