नव भारत के युवाओं को एक संदेश- शैलेंद्र शर्मा

देवभूमि हिमाचल प्रदेश प्राचीन हिंदू ग्रंथों और राज्य में बड़ी संख्या में ऐतिहासिक मंदिरों के रूप में इसके उल्लेख के कारण राज्य को “देव भूमि” (शाब्दिक अर्थ देवताओं का निवास) के रूप में जाना जाता है। स्थानीय रूप से, इसे हिंदू देवताओं के कुछ लोकप्रिय हिंदू मंदिरों के कारण देवताओं की भूमि कहा जाता है। हिमाचली अलौकिक शक्तियों में विश्वास करते हैं। युवा पीढ़ी को बड़ों के साथ समय बिताने और उनके विचारों को सुनने की जरूरत हैI उनके विचारों को सामूहिक ज्ञान भी कहा जाता हैIमध्यकालीन भक्ति-साहित्य की निर्गुण धारा (ज्ञानाश्रयी शाखा) के अत्यंत महत्त्वपूर्ण और विद्रोही संत-कवि कबीर के दोहे पूरी तरह से सामूहिक ज्ञान पर आधारित हैं I

इसी तरह अपने गुरुजनो का आदर मान सम्मान की शिक्षा गुरु गोविन्द सिंह जी के पंज प्यारे भाई दया सिंह ,भाई धरम सिंह, भाई हिम्मत सिंह, भाई मोहकम सिंह, भाई साहिब सिंह से लेनी चाहिए।

उसी तरह जो पूरे भारत में रामायण प्रत्येक वर्ष नाटकीय मंचों द्वारा दिखाई जाती है उसका भी उद्देश्य उसमे घटित होने वाली बातों को समझना और जीवन में उतारना उद्देश्य है जिसका विशेष महत्त्व हैI 

स्वामी विवेकानंद जी ने भी युवाओं की क्षमताओं पर ध्यान दिया; वह चाहते थे कि युवा मानवता की सेवा के लिए खुद को प्रशिक्षित करें। स्वामी विवेकानंद ने विश्व धर्मों की संसद (1893) में भारत और हिंदू धर्म का प्रतिनिधित्व किया। यह धर्मों की पहली विश्व संसद थी और इसे 11 से 27 सितंबर 1893 तक आयोजित किया गया था। दुनिया भर के प्रतिनिधि इस संसद में शामिल हुए, हालाँकि शुरुआत में वह घबरा गए, उन्होंने हिंदू देवी सरस्वती को प्रणाम किया और उन्हें लगा कि उनके शरीर में नई ऊर्जा आ गई है; उन्होंने महसूस किया ,फिर उनका भाषण जिसमे तालियों की गर्जना से समस्त हॉल गूँज उठा,उन्होंने “दुनिया में भिक्षुओं के सबसे प्राचीन आदेश, संन्यासियों के वैदिक आदेश, एक धर्म जिसने दुनिया को सहिष्णुता और सार्वभौमिक स्वीकृति दोनों सिखाया है, की ओर से सबसे कम उम्र के राष्ट्रों को बधाई दी। अपने भाषण के दौरान उन्होंने एक मेंढक का उदाहरण देते हुए बताया की हर एक व्यक्ति कैसे मेंढक की तरह सोचता है की वह जिस कुएं में है बस वही समस्त संसार है I उन्होंने सभी धर्मो को जोड़ने की राह दिखाईI जिसकी शिक्षा और जागरूकता होना अति आवश्यक हैI

जब हम स्कूली शिक्षा सरकारी स्कूल में करते थे तब एक विषय हुआ करता था जिसका शायद मूल्यांकन के दृष्टिकोण से इतना महत्व नहीं था लेकिन उसमे जो कहानिया पढ़ते थे उससे बहुत कुछ सीखने को मिलता था शायद बाकी पुस्तकों से भी ज्यादा महत्व समाज के निर्माण में उस छोटी सी नैतिक शिक्षा की पुस्तक का हुआ करता थाI

महात्मा गाँधी जी ने सत्य और अहिंसा की राह पर चलना सिखाया समाज को जिससे उन्हें राष्ट्रपिता का दर्जा प्राप्त हुआ ,भगत सिंह ,सुखदेव ,राजगुरु ने देश के लिए बलिदान दिए इसलिए उनका नाम आज भी  हमारे दिल में हैI जितने भी हमारे देश के प्रधानमंत्री हुए उन सब का अपना अपना स्थान है और विशेष योगदान है यदि हम इन महान आत्माओं के बारे में आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग करते है तो हम किसी और का नहीं अपने ही राष्ट्र का अहित करते हैI

अटल बिहारी वाजपायी जी ने जो देश के लिए किया वह हमेशा अमर रहेंगे, राजीव गाँधी और इंद्रा गाँधी के ने जो देश के लोगों के लिए बलिदान दिया उसका हम कभी ऋण नहीं उतार सकते।

वर्तमान भारत में आज जो हालात है देश निजीकरण की तरफ जा रहा है और कर्मचारियों को सरकारी करने की जगह आउटसोर्स पर रखा जा रहा है जोकि वास्तविक सेवा पात्रता से बचने के लिए एक दुरपयोग और दिखावा है। मात्र जनता के भविष्य से खिलवाड़ है और यह मुद्दा अत्यंत सवेंदनशील है और आउटसोर्स हिमाचल प्रदेश हित में बिलकुल भी नहीं है यह बात शीतकालीन स्तर में दोनों दल मान चुके है

राजनीती कोई कबड्डी का मैदान नहीं है देश आज जिन परिस्थितियों से और आर्थिक संकट से गुज़र रहा है उसका सभी को मिलकर गंभीरता से हल निकालना होगा , मैं हिमाचल प्रदेश से संबंध रखता हु इसलिए यह बोलना चाहता हूँ की यहाँ की आम जनता काम करके रोजी रोटी कमाती है और एक सम्मान पूर्वक जीवन व्यतीत करती है हिमाचली बहुत ही ज्यादा मेहनती और पूरे देश में अपनी ईमानदारी के लिए माने जाते है कोई भी पार्टी ,संगठन, दल यदि काम करती है तो स्वाभाविक है की लोग उस पार्टी के संगठन या दल के लिए खड़े होते है और हिमाचल प्रदेश सर्वसम्पन्न है ईंधन, परमाणु खनिज कीमती पत्थर औद्योगिक खनिज हर एक दृष्टिकोण से हम सभी को हिमाचली होने पर गर्व है क्योंकि शायद सबसे अधिक धरातल का हिस्सा हिमाचल का वन भूमि है और हम सभी एक संयुक्त परिवार की तरह है I