सरकार और निजी उद्योग नही दे रहे बिजली बिल

पिछले कुछ महीनों में हिमाचल प्रदेश में बिजली के बिलों और नए कनेक्शन के शुल्कों में भारी वृद्धि की गई। नए बिजली के कनेक्शन तीन से चार गुना महंगे हुए। जो बिजली का कनेक्शन पहले 3000 रुपये शुल्क के साथ लगता था अब वह कनेक्शन 15000 में लग रहा है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल कि आखिर इतना ज्यादा बिलों और नए कनेक्शन के बिलों वृद्धि क्यों हुई। इन सबके पीछे के कारण जानकर हिमाचल प्रदेश की जनता के पैरों तले जमीन खिसक सकती है।

जानकारी के मुताबिक हिमाचल प्रदेश सरकार के विभाग ही बिजली के बिल नही भर रहे और दूसरी ओर हिमाचल के बड़े बड़े उद्योगों के भी करोड़ों रुपये के बिल चुकता नही किए गए है। अगर हम अकेले बद्दी की बात करे तो वहां के उद्योगों को बिजली विभाग का 100 करोड़ दे ज्यादा देने को है।

उद्योगों के मालिकों की ऊंची पहुंच और सरकारी विभागों की दादागिरी बिजली विभाग को बिल की उगाही करने से रोकती है। आम आदमी एक बिल ना दे तो बिजली विभाग के कर्मचारी और अधिकारी तुरंत मीटर काटने पहुंच जाते है लेकिन बात सरकारी विभागों और उद्योगों की हो तो उनके मुंह बंद हो जाते है और हाथ काम करना बंद कर देते है।

अकेले धर्मशाला में सरकारी विभागों को बिजली विभाग के 65 से 70 लाख रुपये देने बाकी है। कई बार बिजली विभाग द्वारा नोटिस भेजने पर भी इन विभागों के कानों पर जूं नही रेंगती।

इन उद्योगों और सरकारी विभागों के द्वारा बिल चुकता नही करने के कारण ही बिजली विभाग ने बिजली के रेटों और नए कनेक्शन के रेटों में वृद्धि की है। यह सोचने वाली बात है कि आम आदमी किसी दूसरे की गलती का खामियाजा क्यों भुगते। हिमाचल प्रदेश सरकार को तत्काल कार्यवाही करते हुए सभी सरकारी विभागों से बिजली के बिलों की अदाएगी करवानी चाहिए तथा हिमाचलियों के हितों की रक्षा करते हुए। बिजली के बिलों और नए कनेक्शन के रेटों में की गई वृद्धि को वापिस लेना चाहिए।