देश में मंदी; जीडीपी 8.6 फीसदी घटने की संभावना

देश पूरी तरह मंदी के दौर में जा रहा है। सरकारें और नेता अपनी मस्ती में नजर आ रहे है। नेताओं, पार्टियों और सरकार चलाने वालों के अपने अपने टारगेट है लेकिन देश कहाँ जा रहा है इस बारे कोई नही सोच रहा और फिलहाल ना ही इन सबके पास देश को बचाने की कोई योजना नजर आ रही है। देश के लोगों को हवाई पैकेज के सिवा कुछ भी हासिल नही हो रहा है। फिर चाहे वह कोरोना काल में दिया पैकेज हो या अभी हाल में ही वित्त मंत्री द्वारा दिया जा रहा आत्मनिर्भर पैकेज 3.0 हो।

अगर हम हालिया रिपोर्ट पर बात करे तो कोरोना महामारी के कारण देश की पहली तिमाही में जीडीपी में भारी गिरावट आई थी। जिसके चलते केंद्र ने 20 लाख करोड़ का राहत पैकेज दिया था लेकिन वह पैकेज कहाँ और किस तक पहंचा यह अभी तक किसी को पता नही है। इसी कड़ी में दूसरा पैकेज जारी किया गया है। जिसकी घोषणा पिछले कल वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने की है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राहत पैकेज की घोषणा की और आज सेंसेक्स 250 पॉइंट नीचे लाल निशान पर खुला। निफ़्टी और दूसरे स्टॉक्स की हालत भी ज्यादा बेहतर नजर नही आ रही।

आरबीआई के अधिकारी द्वारा किए गए खुलासे में कहा गया है कि कोरोना महामारी के कारण देश की अर्थव्यवस्था का आकार चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 8.6 फीसदी घट जाएगा। आरबीआई के एक अधिकारी ने कहा कि इस तरह लगातार दो तिमाहियों में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में गिरावट के साथ देश पहली बार मंदी के चक्र में फंस गया है। कोविड-19 महामारी और लॉकडाउन के असर से पहली तिमाही में जीडीपी में 23.9 फीसदी की गिरावट आई थी। 

सरकार ने दूसरी तिमाही के जीडीपी के आंकड़े जारी नहीं किए हैं, लेकिन केंद्रीय बैंक के शोधकर्ताओं ने तात्कालिक पूर्वानुमान विधि का प्रयोग करते हुए अनुमान लगाया है कि जुलाई-सितंबर तिमाही में जीडीपी का आकार 8.6 फीसदी तक घट जाएगा। इससे पहले आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष में जीडीपी में 9.5 फीसदी की गिरावट का अनुमान जताया था। केंद्रीय बैंक के शोधकर्ता एवं मौद्रिक नीति विभाग के पंकज कुमार की ओर से तैयार रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत तकनीक रूप से 2020-21 की पहली छमाही में अपने इतिहास में पहली बार आर्थिक मंदी में फंस गया है।

‘आर्थिक कामकाज सूचकांक’ शीर्षक वाले रिपोर्ट में कहा गया है कि लगातार दूसरी तिमाही में आर्थिक संकुचन का अनुमान है। हालांकि, इसमें यह भी कहा गया है कि गतिविधियां धीरे-धीरे सामान्य हो रही हैं, जिससे जीडीपी में गिरावट की दर घट रही है और स्थिति बेहतर होने की उम्मीद है।