मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार से 120 मासूम बच्चों की मौत

जानकारी के मुताबिक जिन बच्चों की मौत हुई है, उनमें लगभग सभी 10 वर्ष से नीचे के हैं। अकेले श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज ऐंड हॉस्पिटल (एसकेएमसीएच) में अब तक 88 बच्चों की मौत हो चुकी है और केजरीवाल मैत्री सदन अस्पताल में 19 मासूम बच्चों की मौतें हुई हैं। चमकी बुखार का मुख्य कारण लीची फल में पाया जाने वाला टोक्सिन को जिमेवार बताया जा रहा है और दूसरा मुख्य कारण बच्चों में कुपोषण बताया गया है।

इस घटना से अब तक बिहार की पूरी हकीकत सामने लगा कर रख दी है। बिहार में स्वास्थ्य सेवा के हालत बेहद ख़राब है। प्राथमिक चिकित्सा केन्द्रों में बिमारियों से निपटने के लिए कोई इंतजाम नहीं है। अभी तक हॉस्पिटलों में 330 बच्चों का इलाज चल रहा है। आंकड़ों की माने तो पिछले 10 साल में चमकी बुखार से लगभग 1000 बच्चों की मौत हो चुकी है।

चमकी बुखार से मरने वाले ज्यादातर बच्चे महादलित और दलित समुदाय से सम्बन्ध रखने वाले है। इस घटना से यह भी सामने आया है कि अरबों की सहायता देने वाले विश्व स्वास्थ्य संगठन के पैसों का कैसे बिहार में दुरूपयोग किया जा रहा है। ना तो बच्चों को सरकार की और से दिए जाने वाले पोषाहार का सही वितरण किया जा रहा है और ना ही किसी प्रकार से उनको पोषित करने के प्रयास किए जा रहे है।