उत्तराखंड सरकार के प्रवक्ता सुबोध उनियाल कहते हैं, साधु-संतों को तो आप जानते ही हैं, उन्हें रोकना संभव नहीं। सरकार जो कर सकती है वह कर रही है। वहीं कुंभ में आए जूना अखाडे़ के नागा साधु गजेंद्र गिरी कहते हैं कि साधू-संत फक्कड़ होते हैं, उन पर किसी का निर्देश नहीं चलता। हरिद्वार के पुजारी कमलेश ने बताया कि मास्क तो फिर भी कुछ लोग लगा रहे हैं, लेकिन दो गज की दूरी का पालन संभव ही नहीं। अब तो प्रशासन भी कुछ नहीं कहता।

देश में कोरोना की दूसरी लहर कहर बरपा रही है। वहीं, हरिद्वार कुंभ में लाखों की भीड़ जुटने के चलते माना जा रहा है कि मेला सुपर स्प्रेडर बन सकता है। मेला प्रशासन के अनुमान के मुताबिक इस समय हरिद्वार कुंभ मेला क्षेत्र में करीब 1.5 लाख लोग मौजूद हैं। लेकिन, प्रशासन के मुताबिक, 14 अप्रैल को शाही स्नान के दिन भीड़ 20 से 25 लाख तक पहुंच सकती है। जबकि, पिछले 24 घंटों मे उत्तराखंड में संक्रमण के 1,334 मामले आए हैं और 7 मौतें हुई हैं। फिलहाल प्रदेश में कोरोना के 7,846 एक्टिव केस हैं।

स्थानीय प्रशासन खुद मान रहा है कि मेले में दो गज दूरी और मास्क जैसे कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करवाना मुश्किल हो रहा है। शाही स्नान के दौरान यह लगभग नामुमिकन होगा। ऐसे में कोरोना संक्रमण बहुत तेजी से फैल सकता है। अधिकारी सुपर स्प्रेडर जैसी बातों को मान रहें हैं, लेकिन इसको रोकने की इनके पास कोई योजना नहीं है। कुंभ मेले में भीड़ बढ़ने के साथ सोशल मीडिया पर यह बहस भी तेज होती जा रही है कि पिछले साल दिल्ली में तब्लीगी जमात के कार्यक्रम में महज 2,000 लोगों के जमावड़े को सुपर स्प्रेडर बताया गया था, लेकिन कुंभ को लेकर खामोशी है।

यह कुंभ में लगा जूना अखाड़े का शिविर है। यहां इक्का-दुक्का लोगों को छोड़ कोई मास्क में नहीं दिख रहा है।

दो गज दूरी का पालन संभव नहीं
दैनिक भास्कर ने उत्तराखंड के डीजीपी अशोक कुमार से इस बारे में बात की। वे कहते हैं कि ‘लाखों की भीड़ में गाइडलाइन पालन करवाना मुमकिन नहीं है, 9-10 अप्रैल तक हमने गाइडलाइन का पालन करवाने की कोशिश की। लेकिन, भीड़ बढ़ने के साथ दो गज की दूरी का पालन करवाना मुश्किल होता जा रहा है।’ डीजीपी की बातों में प्रशासन की हद और मजबूरी दोनों झलकते हैं। आगे वे अपनी बात को संतुलित करते हुए कहते हैं ’11 अप्रैल को कुंभ में आने वाले 53,000 लोगों का कोरोना टेस्ट हुआ और महज 1.5% यानी 500-550 लोग ही पॉजिटिव पाए गए। संक्रमितों को अस्पताल और क्वारंटीन सेंटर में भेज दिया गया है।’

मेला अधिकारी दीपक रावत कुंभ में चाकचौबंद व्यवस्था होने का दावा करते हैं। लेकिन, ये भी मानते हैं कि दो गज की दूरी का पालन पूरी तरह संभव नहीं हो पा रहा है। रावत कहते हैं ‘लोग चौकन्ने हैं, हमने कोरोना केयर सेंटर भी खोला है। यहां 96 बेड हैं। लोगों से लगातार अपील की जा रही कि वे गाइडलाइन का पालन करें।’

प्रशासन ने कोरोना गाइडलाइन के पालन के लिए RSS के स्वयंसेवकों से भी मदद मांगी है। RSS के कार्यकर्ताओं में भी 2 लोग पॉजिटिव पाए गए हैं।

संघ के स्वयंसेवकों से मांगी मदद
3 अप्रैल को पुलिस महानिरीक्षक, कुंभ मेला संजय गुंज्याल ने प्रांत संघ संचालक को चिट्ठी लिखकर मेले में भीड़ और यातायात को नियंत्रित करने के लिए मदद मांगी थी। अपने लेटर में उन्होंने अपील की थी कि कोरोना के चुनौतीपूर्ण माहौल में संघ के कार्यकर्ता हमारी मदद के लिए आगे आएं। मेले में तैनात संघ के कार्यकर्ता अनिल मिश्रा ने बताया कि यातायात और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए 12-12 घंटे की शिफ्ट हमारे कार्यकर्ता कर रहे हैं। अभी तक 2 लोगों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि भी हुई है।

तब्लीगी जमात पर निशाना, कुंभ पर खामोशी, क्यों?
सोशल मीडिया पर कुंभ में जुटी भीड़ की सैकड़ों तस्वीरें शेयर हो रही हैं। लोग पूछ रहे हैं कि पिछले साल 10-12 मार्च को दिल्ली के निजामुद्दीन में मरकज में जुटी जमात पर सरकार से लेकर जनता तक ने निशाना साधा था। उन्हें सुपर स्प्रेडर कहा गया था। तब्लीग के कार्यक्रम में 2000 से भी कम लोग जुटे थे। जबकि, कुंभ में लाखों लोग जुटे हैं, कोरोना के लिए जारी गाइडलाइन की धज्जियां सरेआम उड़ाई जा रही हैं। लेकिन इस बारे में ज्यादा बात भी नहीं हो रही है।

दिल्ली वक्फ बोर्ड के सदस्य हिमाल अख्तर कहते हैं कि कि पिछली बार तब्लीगी जमात पर कोरोना फैलाने का जो आरोप मढ़ा गया था, वह गलत था। वहां, लोग कोरोना बढ़ने से पहले ही आ चुके थे। अचानक आवाजाही रुकने और पहले का कोई अनुभव न होने की वजह से लोग इधर-उधर भागे। लेकिन इस बार तो अनुभव भी है। कुंभ में बेहिसाब भीड़ जुट रही है, क्या कोरोना वहां नहीं पहुंचेगा? क्या कुंभ के बाद लोग अलग-अलग राज्यों में नहीं जाएंगे? क्या तब्लीगी जमात ही कोरोना स्प्रेडर थी?

महाराष्ट्र सरकार में कपड़ा मंत्री असलम शेख ने भी सोशल मीडिया पर सवाल उठाया है। उन्होंने लिखा है कि पिछले साल तब्लीगी जमात के लोगों का जब कार्यक्रम हुआ था, तब उन लोगों को बहुत बदनाम किया गया। उन्‍हें कोरोना संक्रमण फैलाने वाली जमात कहा गया। अब कहां गए वे लोग? कुंभ में क्या हो रहा है सब देख रहे हैं।

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