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सिर धड़ से अलग और 20 लाशें, खौफनाक मंजर देख कांप जाएगी रूह

Jharkhand News: पश्चिमी सिंहभूम जिले में दहशत का माहौल है। यहां एक पागल हाथी ने आतंक मचा रखा है। यह हाथी अब तक करीब 20 लोगों की जान ले चुका है। मरने वालों में चार मासूम बच्चे भी शामिल हैं। खौफ इतना ज्यादा है कि लोग अपना घर छोड़कर भाग रहे हैं। यह दर्दनाक हिंदी समाचार (Hindi Samachar) पूरे राज्य में चर्चा का विषय बना हुआ है। बेनीसागर गांव की संजू देवी सदमे में हैं। उनके पति प्रकाश दास का सिर धड़ से 50 मीटर दूर मिला था। वन विभाग की टीमें हाथी को पकड़ने की कोशिश कर रही हैं।

सिर कुचल रहा है अकेला हाथी

बेनिसागर गांव में मातम पसरा है। प्रकाश दास जेसीबी ऑपरेटर थे। वह अपने पांच सदस्यों वाले परिवार के अकेले कमाने वाले थे। 9 जनवरी को हाथी ने उन पर हमला किया। हमला इतना भयानक था कि पहचान करना मुश्किल हो गया। प्रकाश दास उन 20 बदनसीब लोगों में से एक हैं जो इस हाथी का शिकार बने। यह हाथी झारखंड और ओडिशा सीमा पर मौत बनकर घूम रहा है। वन विभाग के अधिकारी भी हैरान हैं। उनका कहना है कि इतने कम समय में इतने हिंसक हमले पहले कभी नहीं देखे गए।

मस्त अवस्था में है ‘कातिल’ हाथी

विशेषज्ञों का मानना है कि यह हाथी अपने झुंड से अलग हो गया है। वह ‘मस्त’ अवस्था में है, जिससे वह और भी खतरनाक हो गया है। वन अधिकारी आदित्य नारायण ने बताया कि उनकी टीमें दिन-रात जंगल छान रही हैं। हालांकि, घने जंगलों के कारण हाथी का सही पता नहीं चल पा रहा है। गांव के लोग भी वन विभाग की मदद कर रहे हैं। फिलहाल हमलों में थोड़ी कमी आई है, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। यह हिंदी समाचार (Hindi Samachar) लोगों को सावधान रहने की चेतावनी देता है।

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मचान पर रात गुजारने को मजबूर लोग

गांवों में सन्नाटा पसरा है। मुखिया लक्ष्मण चातर ने बताया कि पुरुष अब अंधेरा होने से पहले घर लौट आते हैं। महिलाएं जंगल नहीं जातीं। कुत्ते के भौंकने पर भी लोगों की सांसे अटक जाती हैं। गोइलकेरा के सोवान गांव में लोग 30 फीट ऊंचे मचान पर सो रहे हैं। मानकी बहांदा ने इसी हाथी के हमले में अपना पूरा परिवार खो दिया। अब वह अपनी जान बचाने के लिए मचान का सहारा ले रहे हैं। उनका बेटा अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहा है।

एक रात में उजड़ गए कई हंसते-खेलते परिवार

6 जनवरी की रात इस हाथी के लिए कयामत की रात थी। बाबरिया गांव में इसने 5 लोगों को मार डाला। आठ साल की सुशीला मेराल का पूरा परिवार खत्म हो गया। वह धान की कटाई वाले मंच पर सो रही थी। हाथी के हमले के बाद वह खून से लथपथ होकर नीचे आई। पड़ोसियों ने बताया कि खून की गंध से हाथी दोबारा हमला कर सकता था, इसलिए वे तुरंत मदद को नहीं आ सके। इसी तरह किसान गुरु चरण लागुरी को हाथी ने 60 मीटर दूर फेंक दिया। उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

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गर्भवती पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल

हल्दिया गांव के दामोदर कुल्डी ने हाथी को भगाने की कोशिश की थी। लेकिन वह खुद उसका शिकार बन गया। दामोदर की पत्नी अमृता गर्भवती है। वह अपने पति के अंतिम संस्कार में बेसुध हो गई। उसका कहना है कि उसने पति को जाने से रोका था, लेकिन वह नहीं माने। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 18 सालों में झारखंड में हाथियों ने 1,270 लोगों की जान ली है। खनन और जंगलों की कटाई से हाथियों के घर उजड़ रहे हैं। यही कारण है कि इंसान और जानवर के बीच यह खूनी संघर्ष बढ़ रहा है।

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