New Delhi: भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में कड़वाहट कोई नई बात नहीं है। लेकिन 1971 में पाकिस्तान ने भारत को घुटनों पर लाने के लिए एक बेहद खतरनाक प्लान बनाया था। इसका नाम ‘ऑपरेशन चंगेज खान’ था। यह एक ऐसा हवाई हमला था जिसने 1971 के युद्ध की औपचारिक शुरुआत की। पाकिस्तान ने इजरायल की तर्ज पर भारतीय वायुसेना को जमीन पर ही खत्म करने की योजना बनाई थी। हालांकि, भारतीय जांबाजों ने दुश्मन की इस साजिश को पूरी तरह नाकाम कर दिया। इसके बाद जो हुआ, उसने दक्षिण एशिया का भूगोल हमेशा के लिए बदल दिया।
पाकिस्तान ने क्यों रची यह साजिश?
इस युद्ध की असली वजह पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में चल रहा राजनीतिक संकट था। साल 1971 में पाकिस्तानी सेना वहां के बंगाली नागरिकों पर कहर बरपा रही थी। सेना के जुल्म से बचने के लिए लाखों शरणार्थी भारत आ रहे थे। इससे भारत पर मानवीय और सुरक्षा का दबाव बढ़ गया। भारत ने पूर्वी पाकिस्तान के स्वतंत्रता आंदोलन का समर्थन करने का फैसला किया। यह बात इस्लामाबाद को नागवार गुजरी। दिसंबर आते-आते दोनों देशों के बीच युद्ध के हालात बन गए। पाकिस्तान ने भारत को बढ़त लेने से रोकने के लिए पहले हमला करने की योजना बनाई।
इजरायल के युद्ध से चुराई थी रणनीति
पाकिस्तान यह हमला पूरी तरह सरप्राइज यानी अचानक करना चाहता था। उसकी यह रणनीति इजरायल के 1967 के ‘सिक्स डे वॉर’ से प्रेरित थी। उस समय इजरायल ने ‘ऑपरेशन फोकस’ चलाकर अरब देशों की वायुसेना को जमीन पर ही तबाह कर दिया था। पाकिस्तानी वायुसेना (PAF) भी इसी तर्ज पर भारतीय एयरबेस को नुकसान पहुंचाना चाहती थी। उनका मानना था कि अगर भारतीय रनवे और विमान नष्ट हो गए, तो भारत हमला नहीं कर पाएगा। इस मिशन का नाम मंगोल शासक चंगेज खान के नाम पर रखा गया, जो अपने आक्रामक हमलों के लिए मशहूर था।
3 दिसंबर की शाम और वो हवाई हमला
तारीख थी 3 दिसंबर 1971 और समय था शाम के करीब 5:45 बजे। पाकिस्तानी वायुसेना ने अचानक भारत के पश्चिमी मोर्चे पर जोरदार हमला बोल दिया। पाकिस्तान ने एक साथ अमृतसर, पठानकोट, श्रीनगर, अवंतीपुरा, उत्तरलाई, आगरा और अंबाला जैसे प्रमुख एयरबेस को निशाना बनाया। पाकिस्तानी विमान रडार की पकड़ से बचने के लिए बेहद नीची उड़ान भर रहे थे। उनका एकमात्र मकसद भारतीय वायुसेना की कमर तोड़ना था।
भारत का पलटवार और पाकिस्तान की हार
पाकिस्तान की यह चाल बुरी तरह उल्टी पड़ गई। यह ऑपरेशन उम्मीद के मुताबिक सफल नहीं हो सका। भारतीय एयरबेस और रनवे को बहुत कम नुकसान पहुंचा। भारतीय वायुसेना ने गजब की फुर्ती दिखाई और तुरंत जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार हो गई। उसी रात प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने राष्ट्र को संबोधित किया। भारतीय वायुसेना ने रात में ही पाकिस्तान के ठिकानों पर बमबारी शुरू कर दी।
इसके बाद अगले 13 दिनों तक भीषण युद्ध चला। भारत ने जमीन, हवा और समंदर तीनों मोर्चों पर पाकिस्तान को घेर लिया। आखिरकार 16 दिसंबर 1971 को पाकिस्तानी सेना ने आत्मसमर्पण कर दिया। इस तरह ‘ऑपरेशन चंगेज खान’ एक बड़ी रणनीतिक भूल साबित हुआ और दुनिया के नक्शे पर एक नए देश ‘बांग्लादेश’ का उदय हुआ।

