शनिवार शाम चार बजे लोगों की भीड़ से घिरा बत्रा अस्पताल लाचार और बेबस परिवारों की चीखों से गूंज रहा था। अभी अंदर घुसे ही थे कि सामने हरे रंग की एंबुलेंस ने रोक दिया। वहां मौजूद सैंकड़ों की तादाद में लोग बस एंबुलेंस को घूरे ही जा रहे थे। डॉक्टर, नर्स, पैरामेडिकल स्टाफ सबकी आंखें नम थीं और वे स्तब्ध भी थे। एंबुलेंस के आगे हाथ जोड़कर खड़े सीनियर डॉक्टरों ने जैसे ही कहा, डॉ. हिमथानी, हम आपको बचा नहीं पाए। आपने 33 साल मरीजों की सेवा की लेकिन एक झटके में आपकी जिंदगी छीन ली।

इन शब्दों ने हर किसी की पीड़ा को उनके कपकपाते होंठ के जरिए बाहर ला दिया। हमारे कोरोना योद्घा रोने लगे, चिल्लाते हुए बोले-अब तो जाग जाओ सरकार। अब हमसे सहन नहीं होता। हमें नरक मत दिखाओ। अपनी इंसानियत को जगाओ…

यह पूरा दृश्य इसलिए था क्योंकि कुछ ही समय पहले यहां 12 लोगों की ऑक्सीजन न मिलने की वजह से मौत हो गई। इसमें अस्पताल के ही विभागाध्यक्ष डॉ. आरके हिमथानी भी थे जोकि कुछ दिन पहले ही संक्रमित होने और ऑक्सीजन का स्तर कम होने की वजह से हाई प्रेशर पर यहां भर्ती हुए थे।

अभी डॉ. हिमथानी को अंतिम विदाई दे ही रहे थे कि तभी एक और आवाज पीछे से आई। अरे डॉ. विवेक ने स्यूसाइड कर ली। सबने हैरानी से पूछा, कौन, कौन? तब पता चला कि साकेत स्थित मैक्स अस्पताल के डॉ. विवेक ने इसलिए जान दे दी क्योंकि वे एक महीने से आईसीयू में ड्यूटी दे रहे थे। हर दिन 6 से 8 लोगों को सीपीआर देकर जान बचाने का प्रयास कर रहे थे लेकिन वह ज्यादातर नाकामयाब ही रहे। इस सूचना के बाद ऐसा लगा मानों वहां के लोगों का रक्तचाप बढ़ गया हो और डॉक्टर व नर्स कहने लगे, इन सरकारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज होना चाहिए। यह कोई आम घटनाएं नहीं बल्कि हत्याएं हैं जिनके खिलाफ सरकारों को जेल में डाल देना चाहिए।

पूरी बिरादरी पर खड़ा हुआ संकट
नेशनल मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विनय अग्रवाल ने कहा 16 दिन से दिल्ली में ऑक्सीजन का संकट है। लोग मर रहे हैं लेकिन राज्य और केंद्र की सरकारें अपनी अपनी दलीलें दे रही हैं। मंत्रियों और नेताओं के बयान शर्मिंदगी से भरे हैं। हमारी पूरी बिरादरी पर संकट आ चुका है। हम और पीड़ा नहीं सहन कर सकते। सरकारी अधिकारियों से हर दिन ऑक्सीजन के लिए भीख मांगनी पड़ रही है। सरकार और अधिकारियों की जवाबदेही होनी चाहिए।

दो दिन बाद पिता को होना था डिस्चॉर्ज
देवली निवासी अरविंद ने बताया कि उनके पिता राम अवतार कोरोना संक्रमित होने की वजह से 15 दिन यहां भर्ती थे। डॉक्टरों ने कहा था कि दो दिन में शायद डिस्चॉर्ज कर दें क्योंकि उनकी बॉडी अच्छा रिकवर कर रही थी लेकिन सुबह जब हर रोज की तरह यहां आया तो हर कोई भाग रहा था। यह देख मेरे भी होश उड़ गए, मैंने पूछा तो पता चला कि ऑक्सीजन न मिलने से कई मर गए।

वे भागते हुए काउंटर तक पहुंचे, उन्होंने अपने पिता के बारे में पूछा लेकिन वहां मौजूद हर कोई भागे ही जा रहा था। काफी लोगों से विनती करने के बाद जब उन्होंने पता किया तो अरविंद के पिता इस दुनिया से जा चुके थे। अरविंद रोते हुए बोला, सरकार, अधिकारी सबको सजा मिलनी चाहिए। मेरे पिता को इन लोगों ने मिलकर मार डाला।

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