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किन्नौर में 102 बर्षीय बजुर्ग महिला ने कोरोना को हराया, डॉक्टरों ने गेट तक छोड़ा


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किन्नौर जिले की 102 वर्षीय बुजुर्ग महिला धर्मदासी ने कोरोना को मात दी है। इनका इलाज आईजीएमसी में चल रहा था, यह महिला वीरवार दोपहर को घर लौट गई है। आईजीएमसी के कॉलेज प्राचार्य डॉ. रजनीश पठानिया और एमएस डॉ. जनक राज महिला को अस्पताल के गेट तक छोड़ने आए। कोरोना काल में अभी तक इतनी अधिक उम्र की महिला ने बीमारी को मात दी है। 102 साल की धर्मदासी शिमला में अपने परिजन के साथ रहती हैं। कुछ दिनों पहले कोरोना के लक्षण दिखे तो उपचार के लिए उन्हें आईजीएमसी लाया गया। 14 मई को महिला का कोरोना टैस्ट पॉजिटिव आया। बताया जा रहा है कि महिला को इस दौरान सांस की तकलीफ, सिर दर्द और बुखार भी था।

मां को लेने अस्पताल पहुंचा था बेटा, डॉक्टरों का जताया आभार

वीरवार को महिला का बेटा आरएस नेगी अपनी मां को लेने आईजीएमसी अस्पताल पहुंचा। आरएस नेगी ने आईजीएमसी के डॉक्टरों, स्टाफ नर्स और अन्य कर्मचारियों का धन्यवाद किया है, जिन्होंने उनकी मां की अस्पताल में अच्छे से देखभाल की। उन्होंने बताया कि अस्पताल के कर्मी उन्हें फोन करके उनकी मां के उपचार, खाना खाने और ऑक्सीजन लेवल से संबंधित जानकारी देते थे। बुजुर्ग महिला जब घर लौटी तो ऑक्सीजन लेवल 97 था और वह बड़ी खुश होकर अस्पताल से घर लौटी।

मेडिकल स्टाफ पूरी लगन से दिन-रात कर रहा कोरोना मरीजों की सेवा : डॉ. जनक

आईजीएमसी के एमएस डॉ. जनक राज का कहना है कि अस्पताल के सभी डॉक्टर व पैरा मैडीकल स्टाफ पूरी लगन से कोरोना मरीजों की सेवा में दिन-रात लगे हुए हैं। अधिकतर मरीज यहां से कोरोना को मात देकर घर जा रहे हैं। उन्हीं में से एक धर्मदासी भी है, जिसने 102 वर्ष क ी आयु में भी हिम्मत नहीं हारी और अस्पताल प्रशासन ने भी इनके इलाज में कोई कसर नहीं छोड़ी। सभी कोरोना मरीजों का समान इलाज किया जा रहा है। कई बार बहुत से मरीज काफी देर के बाद अस्पताल आते हैं, तब काफी देर हो जाती है। फिर भी डॉक्टर्स उनके बचाव में कोई कोर क सर नहीं छोड़ते। उन्होंने कहा कि कोरोना में समय रहते मरीज अस्पताल पहुंच जाए तो उसका इलाज पूरी तरह संभव है। 


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