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नकली एयरपोर्ट बनाकर बैंक से हड़पे 21 अरब रुपये, इतिहास के सबसे बड़े बैंक फ्रॉड की कहानी जान रह जाएंगे दंग

World News: आम आदमी के लिए बैंक से छोटा सा लोन लेना भी लोहे के चने चबाने जैसा होता है। बैंक अधिकारी तमाम दस्तावेज जांचने के बाद ही पैसे देते हैं। लेकिन, जरा सोचिए अगर कोई बिना किसी जमीन या ईंट के पूरा ‘हवाई अड्डा’ ही बेच दे तो? यह फिल्मी कहानी नहीं, बल्कि हकीकत है। इतिहास के सबसे बड़े बैंक फ्रॉड में एक शख्स ने बैंक को 21 अरब रुपये का चूना लगा दिया। उसने बैंक को बताया कि वह एक इंटरनेशनल एयरपोर्ट बना रहा है। हैरानी की बात यह है कि बैंक ने बिना जांच किए पैसे दे भी दिए। नाइजीरिया के एम्मानुएल नवुड ने इस कारनामे को अंजाम दिया था।

बैंक का डायरेक्टर ही निकला मास्टरमाइंड

इस ऐतिहासिक धोखाधड़ी को अंजाम देने वाला कोई और नहीं, बल्कि बैंकिंग सिस्टम का ही एक खिलाड़ी था। एम्मानुएल नवुड नाइजीरिया के यूनियन बैंक में डायरेक्टर के पद पर था। उसे बैंकिंग प्रणाली की हर खामी का पता था। उसने अपने इस अनुभव का गलत इस्तेमाल किया। उसने ब्राजील के एक बैंक डायरेक्टर, नेलसन सकागुची को अपने जाल में फंसाया। एम्मानुएल ने उसे बताया कि नाइजीरिया में एक नया एयरपोर्ट बन रहा है और इसमें निवेश करने पर मोटा मुनाफा होगा।

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बिना जांच के दे दी अरबों की रकम

इस बैंक फ्रॉड की सबसे चौंकाने वाली बात ब्राजील के बैंक की लापरवाही थी। एम्मानुएल ने केवल एक फोन कॉल और कुछ फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नेलसन सकागुची को मना लिया। ब्राजील के बैंक ने एयरपोर्ट के निर्माण की जमीनी हकीकत जाने बिना ही करीब 242 मिलियन डॉलर (उस समय करीब 21 अरब रुपये) जारी कर दिए। न तो वहां कोई एयरपोर्ट बन रहा था और न ही ऐसी कोई योजना थी। यह पैसा सीधे एम्मानुएल और उसके साथियों की जेब में गया।

कैसे हुआ इस महाठग का पर्दाफाश?

सालों तक यह खेल चलता रहा और किसी को कानों-कान खबर नहीं हुई। साल 1997 में एक स्पेनिश बैंक ने ब्राजील के उस बैंक का अधिग्रहण करने की कोशिश की। जब बहीखातों की जांच (ऑडिट) शुरू हुई, तब जाकर इस घोटाले का पता चला। बैंक अधिकारियों के होश उड़ गए क्योंकि जिस एयरपोर्ट के लिए पैसा दिया गया था, वह धरती पर मौजूद ही नहीं था। इसके बाद मामले की जांच शुरू हुई और एम्मानुएल नवुड को मुख्य आरोपी बनाया गया।

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419 स्कैम के नाम से मशहूर हुआ मामला

अदालत में लंबी सुनवाई के बाद एम्मानुएल को दोषी करार दिया गया। उसे शुरुआत में 25 साल की सजा सुनाई गई, हालांकि 2006 में उसे रिहा कर दिया गया। दुनिया भर में इस तरह की ठगी को अब ‘419 स्कैम’ के नाम से जाना जाता है। यह मामला आज भी बैंकिंग इतिहास का तीसरा सबसे बड़ा घोटाला माना जाता है। एम्मानुएल की चालाकी ने दुनिया भर के बैंकों को अपने नियमों को सख्त करने पर मजबूर कर दिया।

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