कानून के विरूद्ध निजी स्कूलों को फीस वसूलने के आदेश जारी-हिमाचल

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हिमाचल प्रदेश सरकार ने निजी स्कूलों को लॉकडाउन के दौरान नही दी स्कूल फीस वसूलने की छूट दे दी है। यह फैसला कैबिनेट की मीटिंग में लिया गया और शिक्षा सचिव राजीव शर्मा ने उच्च और प्रारभिक शिक्षा निदेशालय को पत्र भी जारी कर दिया है। लॉक डाउन के दौरान पहले हिमाचल प्रदेश में निजी स्कूलों को फीस ना लेने के आदेश दिए थे। लेकिन 25 मई को निजी स्कूलों को सिर्फ ट्यूशन फीस लेने का आदेश दिया था। जिसमे कहा गया था कि ट्यूशन फ़ीस बढ़ाई नही जाएगी बल्कि पिछली साल में ली जा रही फीस के बराबर ट्यूशन फीस लेंगे।

निजी स्कूलों के दबाब में अक्टूबर माह के पहले सप्ताह में शिक्षा निदेशालय ने फीस की स्थिति को स्पष्ट करने के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा था और पूछा था कि अभी भी ट्यूशन फीस लेनी है या फिर पूरी फीका ली जाए। उसके बाद कैबिनेट मीटिंग में इस विषय पर चर्चा हुई और सरकार ने बकाया फीस वसूलने के आदेश जारी कर दिए। यह साफ है कि निजी स्कूलों के दबाब के चलते यह आदेश दिए गए है।

निजी स्कूलों की फीस के बारे कानूनी पक्ष

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि हाई कोर्ट के आदेशों के मुताबिक अगर कोई अभिभावक फीस चुकाने में सक्षम नही है तो इस बारे स्कूल को लिखित में सूचना दे। स्कूल एक कमेटी बना कर सहानुभूति पूर्वक विचार करे। हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि सरकार निजी स्कूलों को किसी भी प्रकार की आर्थिक मदद नही दे सकती। स्कूलों की आय का साधन एक मात्र फीस वसूली है।

इस मामले में अगर शिक्षा का अधिकार कानून को देखा जाए तो कानून में 3 से 14 साल के बच्चों के लिए साफ साफ प्रवधान है और सरकारी स्कूलों में यही प्रवधान लागू है। सरकार अपनी ओर से शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए मिड डे मिल, मुक्त वर्दी और अब मुफ्त स्कूल बैग दे रही है। पहली कक्षा से 8वी कक्षा तक 1 रुपया भी बच्चों से नही वसूला जाता। जबकि इसके ठीक विपरीत निजी स्कूल भारतीय कानून शिक्षा का अधिकार अधिनियम की धज्जियां उड़ाते नजर आते है।

जब इस बारे आम लोगों से बात की गई तो उनका कहना था कि सरकार जब खुद कानून की धज्जियां उड़ाए तो उसको कौन रोक सकता है। सोशल मीडिया पर भी लोगों में सरकार के इस फैसले की निंदा की है। बहुत से लोगों ने सरकार के इस फैसले को अभिभावकों का विरोधी बताया है।

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